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रविवार, 13 जून, 2004 को 15:58 GMT तक के समाचार

बातचीत बहुत ज़रूरी है: पाटिल

भारत के गृह मंत्री शिवराज पाटिल का पाकिस्तान के साथ रिश्तों को लेकर कहना है कि देश के सामने अभी बहुत से सवाल हैं और ज़रूरी ये है कि बातचीत जारी रहे.

'आपकी बात बीबीसी के साथ' कार्यक्रम में श्रोताओं के सवालों के जवाब देते हुए पाटिल ने कहा, "हम बातचीत के ज़रिए ही परिस्थिति सुधारने की कोशिश करेंगे. हमारी कोशिश यही होगी कि जब स्थिति सुधरे तो उसके अच्छे नतीजे भी सामने आएँ."

गृह मंत्री का कहना था कि सरकार ने बातचीत का रास्ता अपनाया है. इसके अलावा जो भी बात पाकिस्तान सरकार कहती है उस पर सोच समझकर ही राय दी जाएगी जिससे स्थितियाँ सुधरें.

उधर कश्मीर में हालात सुधारने के लिए हुर्रियत कान्फ्रेंस से बातचीत को लेकर पाटिल का कहना था कि जो भी बातचीत के लिए आगे आएगा उससे बातचीत की जाएगी, मगर पहले हुर्रियत से ही बात होगी.

'आतंकवाद' से संबंधित क़ानून 'पोटा' के बारे में गृह मंत्री का कहना था, "हमने कह दिया है कि पोटा ज़रूरी नहीं था, उससे आतंकवाद कम नहीं हुआ बल्कि उसके दुरुपयोग के मामले भी सामने आए और पिछली सरकार ने भी उसमें संशोधन करने की बात कही थी."

पाटिल ने कहा कि देश के मौजूदा क़ानून अपराधों से निपटने के लिए काफ़ी हैं, यदि पोटा में संशोधन के हालात बनते हैं तो सबकी सहमति से संसद में उस दिशा में क़दम उठाया जा सकता है.

दंगों के मामले में सुनवाई में हो रही देरी के बारे में गृह मंत्री का कहना था कि अगर न्याय में देर होती है तो लोगों का विश्वास न्याय व्यवस्था और सरकार से उठ सकता है.

इस बारे में कुछ क़दमों का ज़िक्र करते हुए पाटिल ने कहा, "पुलिस व्यवस्था में क्या सुधार हो सकता है, क्या न्यायालयों की संख्या बढ़ाने से स्थिति सुधरेगी, पूरी प्रक्रिया में क्या सुधार की ज़रूरत है, और लोगों तक मीडिया के ज़रिए ग़लत संदेश नहीं जाना चाहिए, इन सब बारे में विचार किया जाएगा."

गुजरात के बारे में पाटिल का कहना था कि वहाँ की स्थिति पर उच्चतम न्यायालय ने अपना विचार दे दिया है और जो कुछ भी करना होगा वह संविधान के मुताबिक़ ही होगा.

कथित अपराधियों को मंत्री बनाए जाने को लेकर हुए विवाद के बारे में पाटिल का कहना था कि सिर्फ़ मामला दाख़िल हो जाने से किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता.

उन्होंने कहा, "इस बारे में आज आवाज़ भी कौन उठा रहा है जिन्होंने लाखों लोगों के सामने अपराध किए और उनके अपराध की वजह से हज़ारों लोगों की जानें गईं वे आज कह रहे हैं कि हम तो अपराधी होकर मंत्री रह सकते हैं मगर आपको ऐसा करने का अधिकार नहीं है."

गृह मंत्री ने ये भी स्पष्ट किया कि सरकार राजनीति से अपराधीकरण को दूर रखना चाहती है.

अयोध्या मसले के हल के बारे में पूछे जाने पर उनका कहना था, "हमारा ख़याल है कि धर्म को इंसानों को जोड़ने वाला होना चाहिए, तोड़ने वाला नहीं."

गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि अयोध्या के बारे में अदालत जो फ़ैसला देगी वही मान्य होगा.