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बुधवार, 09 जून, 2004 को 15:56 GMT तक के समाचार

'समय लगने से नहीं हुई अधिक मौतें'

संसद में 'दाग़ी' मंत्रियों के मुद्दे पर हुए हंगामे के बीच रक्षा मंत्री प्रणब मुखर्जी ने करगिल संघर्ष के बारे में मीडिया में आई ख़बरों पर स्पष्टीकरण दिया.

उन्होंने इस संबंध में पूर्व सरकार को 'क्लीनचिट' देते हुए कहा कि करगिल लड़ाई के दौरान न तो सरकार और न वायुसेना की ओर से कोई कोताही बरती गई.

प्रणब मुखर्जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि वायुसेना का इस्तेमाल 25 मई तक इसलिए नहीं किया गया क्योंकि माना जा रहा था कि ऐसा करने से युद्ध और भीषण हो जाएगा.

उन्होंने इस बारे में छपी मीडिया रिपोर्ट में उस ज़िक्र को भी ग़लत बताया जिसके अनुसार यदि वायुसेना का इस्तेमाल होता तो मारे जाने वालों की संख्या 474 से कहीं कम होती.

पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फ़र्नांडिस ने इसका स्वागत किया और कहा कि इससे फ़ौज की भूमिका पर उठ रहे सवाल थम जाएँगे.

जॉर्ज फिर विवाद में

जॉर्ज फ़र्नांडिस का कहना था, "जिस दस्तावेज़ के आधार पर करगिल संबंधी ख़बर छपी है उस दस्तावेज़ में इस बात का कोई ज़िक्र नहीं है कि यदि वायुसेना का इस्तेमाल पहले इस्तेमाल होता तो इतने लोग न मारे जाते."
 जिस दस्तावेज़ के आधार पर करगिल संबंधी ख़बर छपी है उस दस्तावेज़ में इस बात का कोई ज़िक्र नहीं है कि यदि वायुसेना का इस्तेमाल पहले इस्तेमाल होता तो इतने लोग न मारे जाते
 
जॉर्ज फ़र्नांडिस

भारत में एक टीवी चैनल ने ये मुद्दा भी उठाया कि जॉर्ज जिस दस्तावेज़ के आधार पर बात कर रहे हैं और दिखा रहे हैं वो गोपनीय दस्तावेज़ उनके पास पद छोड़ने के बाद भी क्यों है?

काँग्रेस प्रवक्ता आनंद शर्मा ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि गोपनीय कागज़ रखने का अधिकार उन्हें तब तक ही था जब तक वे पद पर थे.

लेकिन जार्ज फ़रनैंडिस ने कहा कि उन्होंने देश, सेना और ख़ुद के सम्मान की रक्षा के लिए ये दस्तावेज़ अपने पास रखे हैं और ये उनकी निजी प्रति है.

उधर इसी मुद्दे पर लेफ़्टिनेंट जनरल वीआर राघवन ने बीबीसी को बताया कि इस विषय में सेना पर दोष कम लेकिन राजनीतिक दोषारोपण ज़्यादा हो रहा है.

उन्होंने माना कि इस बारे में देरी हुई और सैनिक रणनीति की दृष्टि से ये ग़लत था. लेकिन उन्होंने ये भी माना कि उसकी वजह थी सरकार के फ़ैसला लेने के प्रक्रिया में ख़ामियाँ.