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सोमवार, 07 जून, 2004 को 16:51 GMT तक के समाचार

आसान नहीं है यह काम: साहिब सिंह वर्मा

राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जिन प्रमुख नीतियों की चर्चा की उसमें शामिल है हर ग्रामीण परिवार से एक व्यक्ति को साल में 100 दिन रोज़गार पर गारंटी.

पूर्व श्रम मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेता साहिब सिंह वर्मा का कहना है कि यह काम इतना आसान नहीं है.

उन्होंने कहा, "ये कहना बहुत आसान है लेकिन यह बहुत कठिन काम है. अगर ये सरकार इसे कर पाएगी तो मैं इस सरकार को बधाई दूँगा."

साहिब सिंह वर्मा ने कहा कि सरकार के सामने सबसे मुश्किल बात यही होगी कि कैसे वे उन परिवारों की पहचान करेंगे जिनके एक सदस्य को वे कम से कम 100 दिनों के रोज़गार की गारंटी देंगे.

उन्होंने कहा कि यह काम भी मुश्किल होगा कि वे इन लोगों को किस तरह का काम देंगे और कहाँ देंगे.

हालाँकि साहिब सिंह वर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि यह असंभव काम नहीं है और अगर सरकार के पास पैसा और ऐसे अधिकारी हैं जो इस काम को अंज़ाम दे सकें तो यह बहुत की श्रेष्ठ कार्य होगा.

लेकिन इसमें राज्य सरकार की भी भूमिका होगी और पैसा केंद्र को देना होगा.

क़ानून की ज़रूरत

मज़दूर संगठन सीटू के राष्ट्रीय महासचिव तपन सेन ने कहा कि सरकार की नीतियों में इस बात का शामिल होना मज़दूर संगठनों के दबाव के कारण हुआ है.

उन्होंने कहा कि अभी तो सरकार ने सत्ता ही संभाली है इसलिए उनके काम करने के तरीक़े को देखने के बाद ही यह कहा जा सकेगा कि उनकी इस योजना पर विश्वास है या नहीं.

तपन सेन ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर ज़ोर देते हुए कहा कि अगर सरकार अपनी नीतियों में बदलाव नहीं करेगी तो चाह कर भी उससे यह काम नहीं होगा.

उन्होंने कहा कि इस योजना से लाभान्वित होने वाले परिवारों की पहचान करने के लिए सरकार को क़ानून बनाना होगा.

तपन सेन ने कहा कि अगर राजनीतिक इच्छाशक्ति हो तो इसे लागू कराना असंभव नहीं. उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने अपनी दिशा बदली तो आंदोलन किया जाएगा.