शुक्रवार, 05 जून, 2009 को 22:35 GMT तक के समाचार
सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख़्त ने कट्टरपंथी सिख नेता जरनैल सिंह भिंडरांवाले को छह जून सन 2003 को 'शहीद' घोषित कर दिया.
जरनैल सिंह भिंडरांवाले 1984 में तब मारे गए थे जब भारतीय सेना ने ऑपरेशन ब्लूस्टार के तहत चरमपंथियों के ख़िलाफ़ अमृतसर में स्वर्ण मंदिर परिसर में कार्रवाई की थी.
सिखों के एतिहासिक गुरुद्वारों की देखरेख करने वाली निर्वाचित सदस्यों की संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने 19 वर्षों तक इस मामले में चुप्पी साध रखी थी.
भिंडरांवाले सिख धर्म और ग्रंथों के बारे में शिक्षा देने वाली संस्था - दमदमी टकसाल से संबंध रखते थे.
ये संस्था ये मानने को तैयार नहीं था कि वे ऑपरेशन ब्लूस्टार में मारे गए थे.
बेटे को सिरोपा
अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर परिसर में सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख़्त पर मुख्य ग्रंथी ने जरनैल सिंह भिंडरांवाले की याद में 'अरदास' की.
उन्होंनें भिंडरांवाले के बड़े पुत्र ईशर सिंह को सरोपा यानी सम्मान चिन्ह दिया.
अकाल तख़्त सिख धर्म की वो सर्वोच्च संस्था है जिसका फ़ैसला सिख धर्म और अकाली राजनीति के बारे में अंतिम माना जाता है और सभी सिखों को इसे मानना होता है.
उधर दमदमी टकसाल लगातार दावा करती आई है कि भिंडरांवाले जीवित हैं और उपयुक्त समय पर अपने जीवित होने का प्रमाण देंगे.