तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने विपक्षी नेता करुणानिधि के ख़िलाफ़ मामले समेत अपने कई फ़ैसले वापस ले लिए हैं.
इन फ़ैसलों में द्रमुक पार्टी के अध्यक्ष एम करुणानिधि समेत कई नेताओं के ख़िलाफ़ मामलों को वापस लिया जाना शामिल है.
जयललिता ने धर्मांतरण विरोधी क़ानून, हिंदू अख़बार के ख़िलाफ़ मानहानि मामले और सरकारी कर्मचारियों के ख़िलाफ़ मामले भी वापस लिए जाने की घोषणा की है.
उन्होंने अपने कई विवादास्पद फ़ैसलों को वापस लेने की घोषणा हाल के लोकसभा चुनावों में अपनी पार्टी अन्नाद्रमुक की भारी हार के बाद की है.
अन्नाद्रमुक गठबंधन को तमिलनाडु और पांडिचेरी की सभी 40 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा है.
अन्नाद्रमुक नेता ने किसानों को मुफ़्त बिजली आपूर्ति फिर से शुरू करने की भी घोषणा की है. साथ ही राशन कार्ड को लेकर लगी शर्तों को भी हटा लिया गया है.
उन्होंने कहा है कि छात्रों को मुफ़्त बस पास की सुविधा भी फिर से शुरू की जा रही है.
द्रमुक की प्रतिक्रिया
एक बयान में जयललिता ने कहा है कि उनकी सरकार हमेशा ही जनता की सरकार रही है और उन्होंने आम लोगों की आकांक्षाओं को ध्यान में रखा है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार द्रमुक नेता करुणानिधि ने राज्य सरकार के फ़ैसलों के बारे में कहा है कि यह नेत्र ज्योति जाने के बाद सूर्य की पूजा करने के समान है.
उल्लेखनीय है कि सूर्य द्रमुक पार्टी का निशान भी है.
करुणानिधि ने कहा कि आगामी विधान सभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए जयललिता जनता को बेवकूफ़ बना रही हैं.