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गुरुवार, 13 मई, 2004 को 13:31 GMT तक के समाचार

सलमा ज़ैदी

सोनियाः सत्ता के शिखर का सफ़र

इंग्लैंड का कैंब्रिज विश्विद्यालय. वर्ष 1965. उन्नीस साल की शर्मीली सोनिया माइनो की मुलाक़ात राजीव गाँधी से हुई तो वह यह भी नहीं जानती थीं कि वे नेहरू-गाँधी परिवार के वारिस से मिल रही हैं.

दोनों की मुलाक़ातें बढ़ीं और फिर राजीव सोनिया को अपनी माँ से मिलाने भारत लाए.

पहली नज़र में ही वह इंदिरा गाँधी के मन को भा गईं और 1968 में सोनिया राजीव से विवाह कर सोनिया गाँधी बन गईं.

शादी के समय उन्होंने खादी की वही गुलाबी साड़ी पहनी जो नेहरू जी ने जेल में चर्ख़े पर अपने हाथों बुनी थी और जो इंदिरा गाँधी ने अपने विवाह के समय पहनी थी.

लेकिन आइए थोड़ा पीछे लौटें.

इटली का एक छोटा सा शहर तुरीन और उसका गाँव ओवासान्यो. नौ दिसंबर, 1946 को मध्यमवर्गीय माइनो परिवार में सोनिया का जन्म हुआ.

कॉलेज की पढ़ाई के लिए वह लंदन आईं और फिर राजीव से मुलाक़ात के बाद तो उनकी दुनिया ही बदल गई.

संजय गाँधी की मौत के बाद राजीव ने अपनी इंडियन एयरलाइन्स की नौकरी छोड़ कर राजनीति में प्रवेश का इरादा किया तो सबसे ज़्यादा सोनिया ने ही इसका विरोध किया.

राजीव के प्रधानमंत्री बनने के बाद वह उनके साथ-साथ रहीं और अमेठी की जनता ने उन्हें बहू स्वीकार कर लिया.

21 मई, 1991 में राजीव की हत्या के बाद सोनिया कुछ समय के लिए पृष्ठभूमि में चली गईं.

उन्होंने अपना पूरा समय अपने बच्चों राहुल और प्रियंका की परवरिश में लगा दिया.

लेकिन फिर 1998 में वह सक्रिय हुईं और कॉंग्रेस अध्यक्ष चुनी गईं.

सोनिया गाँधी 1984 में भारत की नागरिकता स्वीकार कर चुकी थीं लेकिन देखा जाए तो वह कॉंग्रेस अध्यक्ष के पद पर आने वाली तीसरी विदेशी मूल की महिला हैं.

उनसे पहले ऐनी बेसेंट और नेली सेनगुप्ता इस पद पर आ चुकी हैं.

वैसे गाँधी परिवार की वह पाँचवीं ऐसी सदस्य हैं जिन्होंने कॉंग्रेस की बागडोर संभाली है.

उनसे पहले मोतीलाल नेहरू, जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी यह ज़िम्मेदारी निभा चुके हैं.

2004 के चुनाव में उनके विरोधियों ने उनके विदेशी मूल के मुद्दे को उठाने का भरसक प्रयास किया लेकिन चुनावी नतीजे देख कर लगता है कि मतदाता ने इसे उनके ख़िलाफ़ नहीं ठहराया.