बुधवार, 12 मई, 2004 को 13:01 GMT तक के समाचार
विनोद वर्मा
दिल्ली से
आंध्र प्रदेश के चुनाव परिणाम ने लोकसभा परिणाम आने के एक दिन पहले ही राजधानी दिल्ली में राजनीतिक हलचलें एकाएक बढ़ा दी हैं.
सरकार बनाने की जुगत लगाने के लिए दिल्ली में और राज्यों की राजधानियों में अलग-अलग पार्टियों के नेताओं ने कहीं खुलकर तो कहीं गुपचुप बैठकें कीं, बयान दिए.
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के महासचिव हरकिशन सिंह सुरजीत जहाँ ग़ैर एनडीए दलों की राजनीति के केंद्र में विभिन्न नेताओं से बात कर रहे हैं वहीं भाजपा के भीतर भी परिणामों के बाद की परिस्थितियों पर चर्चा हो रही है.
बैठक
आंध्र प्रदेश के चुनाव परिणामों से चिंतित भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार की सुबह एक बैठक की.
प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निवास - सात, रेसकोर्स रोड पर हुई इस बैठक में पार्टी अध्यक्ष वेंकैया नायडू और वित्तमंत्री जसवंत सिंह ने आंध्र प्रदेश के चुनाव परिणामों की समीक्षा की.
ख़बर है कि इस बैठक में 13 मई को परिणाम आने के बाद संभावित परिस्थितियों के बारे में भी विस्तृत चर्चा हुई.
इस बैठक के बाद पार्टी अध्यक्ष वैंकया नायडू ने पत्रकारों से बातचीत में एनडीए को पूर्ण बहुमत का भरोसा जताया.
उन्होंने संकेत दिए कि यदि एनडीए को बहुमत नहीं मिला तो वे समर्थन जुटाने का पूरा प्रयास करेंगे.
जोड़तोड़
इस बीच दिल्ली में यह चर्चा चल रही है कि एनडीए के संयोजक जॉर्ज फ़र्नांडिस पुराने साथियों, ख़ासतौर पर एमडीएमके और पीएमके से चर्चा करने के लिए चेन्नई जाने वाले हैं.
वैसे जॉर्ज फ़र्नांडिस उन लोगों से भी बात करने की कोशिश कर रहे हैं जो पहले एनडीए में नहीं थे.
हालाँकि अख़बारों में छपी ख़बरों को आधार मानें तो उन्होंने एनसीपी नेता शरद पवार से भी बात करने की कोशिश की थी लेकिन पवार ने उनसे बात नहीं की.
दिल्ली में यह भी चर्चा तेज़ है कि सरकार बनाने की पूरी कसरत की कमान एनडीए ने अपने संयोजक फर्नांडिस को सौंप दी है.
सुरजीत फिर व्यस्त
सीपीएम नेता हरकिशन सिंह सुरजीत एक बार फिर ग़ैर एनडीए दलों को एक करने की कोशिशों में व्यस्त हो गए हैं.
मंगलवार को सोनिया गाँधी ने सुरजीत से मुलाक़ात की थी और फिर शरद पवार भी सुरजीत से मिलने पहुँचे.
आँध्र प्रदेश के नतीजों के बाद ग़ैर एनडीए दलों को लग रहा है कि केंद्र में ग़ैर एनडीए सरकार बनने की संभावना है.
बुधवार को समाजवादी पार्टी नेता मुलायम सिंह यादव ने सुरजीत से मुलाक़ात की और फिर पूर्व प्रधानमंत्री और जनता दल (एस) नेता देवेगौड़ा भी उनसे मिले.
कांग्रेस नेता एस जयपाल रेड्डी भी हरकिशन सिंह सुरजीत के निवास पर पहुँचे थे.
मुलायम के पत्ते
हरकिशन सिंह सुरजीत से मुलाक़ात के बाद मुलायम सिंह ने पत्रकारों से जो बातचीत की उसका सार यह था कि केंद्र में किसी सरकार के गठन के बारे में वह अपना विकल्प खुला रखना चाहते हैं.
उन्होंने कहा कि नई सरकार के बारे में परिणाम आने के बाद ही बात हो सकती है.
हालाँकि उन्होंने कहा कि वे प्रधानमंत्री या उपप्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नहीं है लेकिन सोनिया गाँधी को प्रधानमंत्री बनाने के सवाल पर उन्होंने कहा, ''मैं उनका समर्थन भी नहीं करता, विरोध भी नहीं....''
उधर पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौड़ा ने बुधवार को खुलकर कांग्रेस का विरोध किया.
उन्होंने कहा है कि 1996 में कांग्रेस ने उनकी सरकार गिराई थी और वे किसी भी सूरत में कांग्रेस का समर्थन नहीं कर सकते.
ग़ैर एनडीए राजनीति के केंद्र में बने हुए सुरजीत ने कहा है कि सभी दलों के बीच बातचीत जारी है.
उन्होंने कहा कि सभी दलों को एक दूसरे की बात समझनी होगी.
उन्होंने इस बात को भी ख़ारिज कर दिया कि राज्यों में कांग्रेस विरोध की राजनीति करने वाले दलों को केंद्र में कांग्रेस का समर्थन करने में दिक़्क़त होगी.
उनका कहना था कि वामपंथी दल भी पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के ख़िलाफ़ राजनीति करते हैं.
सबसे बड़े दल का प्रधानमंत्री बनाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यह ज़रुरी नहीं है क्योंकि पहले छोटे दलों के लोग भी प्रधानमंत्री बन चुके हैं.