सोमवार, 10 मई, 2004 को 21:00 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान के अफ़ग़ान सीमा से लगे क़बायली इलाक़े दक्षिणी वज़ीरिस्तान में क़बायलियों ने अल क़ायदा के संदिग्ध लड़ाकों से मुक़ाबला करने का संकल्प लिया है.
दक्षिणी वज़ीरिस्तान में क़बायली सरदारों ने कहा है कि अल क़ायदा के लड़ाकों का मुक़ाबला करने के लिए 1800 सशस्त्र लड़ाकों की एक फौज बनाई जाएगी.
सरदारों ने कहा है कि ऐसे किसी मक़सद के लिए बनाई जाने वाली यह अब तक का सबसे बड़ा दल यानी लश्कर होगा.
पाकिस्तान के पेशावर से क़रीब 400 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में अहमदज़ई वज़ीर क़बीले ने यह फ़ैसला किया है.
यह पहला मौक़ा है कि इस क्षेत्र में छोटे-बड़े तमाम क़बीले अल क़ायदा का मुक़ाबला करने के लिए एकजुट हुए हैं.
इस नवगठित लश्कर का काम होगा दक्षिणी वज़ीरिस्तान इलाक़े में विदेशियों की पहचान करके उनका विवरण दर्ज करना और अधिकारियों को मुहैया कराना.
इस तरह का एक समझौता पिछले महीने हुआ था.
संभावना है कि मंगलवार को वाना में इस फौज का गठन किया जाएगा और तभी इसकी तैनाती और तमाम अन्य नियम तय किए जाएंगे.
विरोध
लेकिन इस तरह के लश्कर के गठन की पहले से ही आलोचना होने लगी है.
एक स्थानीय प्रमुख क़बायली चरमपंथी नेक मोहम्मद ने बीबीसी को बताया है कि दक्षिणी वज़ीरिस्तान इलाक़े में कोई विदेशी नहीं छुपा हुआ है.
नेक मोहम्मद ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने पिछले महीने हुए समझौते में मानी गई शर्तों को तोड़ा तो वह ख़ुद और उनके साथी हथियार उठाने से नहीं हिचकेंगे.
उन्होंने कहा कि सरकार ने वादा किया था कि इलाक़े में फिर कोई अभियान नहीं चलाया जाएगा.
नेक मोहम्मद ने तर्क दिया कि समझौते में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिसके तहत विदेशियों का पंजीकरण किया जाए.
लेकिन पश्चिमोत्तर सीमा प्रांत के गवर्नर ने इस दलील को यह कहते हुए ग़लत बताया है कि समझौते में साफ़तौर पर कहा गया है कि विदेशियों का यह दायित्व है कि वे अधिकारियों के साथ अपना पंजीकरण कराएं.
गवर्नर के दफ़्तर से जारी एक बयान में कहा गया है कि अनेक बार निवेदन मिलने के बाद विदेशियों के पंजीकरण की समय सीमा बढ़ाई जाती रही है.
गवर्नर ने चेतावनी दी है कि अगर विदेशी ख़ुद का पंजीकरण नहीं कराते हैं तो 'अन्य विकल्पों' का रास्ता खुला है.
उधर पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मसूद ख़ान ने कहा है कि अगर इस शर्त का पालन नहीं किया गया तो कोई समझौता नहीं किया जाएगा.
"एक बार उनके पंजीकरण के बाद ही यह साफ़ किया जा सकेगा कि वे आतंकवादी हैं या नहीं."
मसूद ख़ान ने कहा कि अगर वे आतंकवादी नहीं हैं तो उन्हें परेशान होने की कोई ज़रूरत नहीं है, वे ख़ुद ही आगे आएँ और अधिकारियों के यहाँ अपना पंजीकरण बिना किसी डर के करा सकते हैं.