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कांग्रेस आक्रामक, भाजपा बचाव में

जैसे-जैसे चुनाव अपने आख़िरी दौर की तरफ़ बढ़ रहा है, चुनावी तस्वीर बदलती जा रही है. अब कांग्रेस आक्रामक होती जा रही है जबकि भारतीय जनता पार्टी अब बचाव की मुद्रा में आ गई है.

जबकि चुनाव के आरंभ से तीसरे चरण के मतदान तक भाजपा दावे पर दावे करती नहीं थक रही थी और कांग्रेस बचाव की मुद्रा में थी.

जहाँ ऐक्ज़िट पोल कांग्रेस को बढ़त मिलने की बात कह रहे हैं, वहीं कहा जा रहा है कि भाजपा गठबंधन को सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत मिलने में कठिनाई हो सकती है.

अनुमान नहीं था - वाजपेयी

तीसरे चरण के मतदान बाद सर्वेक्षणों ने पूरे चुनावी माहौल को पलटना शुरू कर दिया है. इसकी झलक आज अलीगढ़ में प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी की एक चुनावी सभा में देखने को मिली.

अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने कहा, ''चुनाव बाद के सर्वेक्षण कांग्रेस और भाजपा, दोनों की ही बढ़त दिखा रहे हैं. हमें ऐसा अनुमान नहीं था.''

हालांकि, वाजपेयी ने कहा कि इससे पहले पार्टियाँ तो बहुत थीं, पर कांग्रेस को देश भर में टक्कर किसी ने नहीं दी थी.

उधर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने हरियाणा में एनडीए सरकार के ‘इंडिया शाइनिंग’ के प्रचार पर हमला करते हुए कहा कि समाज के किसी भी वर्ग में समृद्धि नहीं आई है.

उनका कहना था कि यदि विज्ञापन पर खर्च होने वाली राशि को विकास के कार्यों में लगाया जाता तो देश के लिए ज़्यादा बेहतर होता.

कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने आज पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि भाजपा गठबंधन अब हार की कगार पर है और उसे कुछ भी सूझ नहीं रहा है.

जहाँ सिंघवी ने अगले प्रधानमंत्री के सवाल पर वाजपेयी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे तो रिटायर हो रहे हैं.

वहीं भाजपा महासचिव मुख़्तार अब्बास नकवी ने कहा कि कांग्रेस गठबंधन केवल नाम का गठबंधन है और यह गठबंधन अभी तक अपना नेता तय नहीं कर सका है.

प्रधानमंत्री तय करने के सवाल पर कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा है कि कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला तो कांग्रेस अपना उम्मीदवार घोषित करेगी लेकिन यदि गठबंधन को बहुमत मिलता है तो गठबंधन के नेता ही तय करेंगे कि प्रधानमंत्री कौन होगा.

वामपंथी दल

वामपंथी दलों की ओर से आज मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि नई सरकार का मुखिया कौन होगा यह तो चुनाव परिणाम आने के बाद ही तय होगा.

उनका कहना था कि जिसके पास ज़्यादा सीटें होंगी वही अपना प्रधानमंत्री देगा चाहे वह कांग्रेस हो या ग़ैर कांग्रेसी-ग़ैर भाजपा दलों का गठबंधन. जैसा कि 1996 में संयुक्त मोर्चे ने किया था.

उनका कहना था कि यह तय है कि नेता के चयन को लेकर कोई दिक्कत नहीं होने वाली है.