पाकिस्तान ने अपनी सेना से 50,000 सैनिक कम करने की घोषणा की है.
पाकिस्तान के 57 वर्ष के इतिहास में ये पहला मौका है, जिसमें सैनिकों की संख्या में कटौती की कोई योजना बनाई गई है.
सेना के अनुसार ये कटौती प्रशासन और इससे जुड़े कुछ अन्य विभागों में की जाएगी और इससे सेना की लड़ने की क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ की अध्यक्षता में हुई सेना के कमांडरों की दो दिन की एक बैठक के बाद ये फ़ैसला लिया गया. घोषणा के अनुसार कटौती एक अगस्त से लागू होगी.
फ़िलहाल पाकिस्तान की सेना में क़रीब 550,000 सैनिक हैं और माना जा रहा है कि इस कटौती से करोड़ों रूपयों की बचत होगी.
बेहतर संबंध
ब्रिगेडियर फयाज़ अहमद सत्ती ने एएफ़पी समाचार एजेंसी को बताया, "सैनिकों की संख्या में कटौती से जो बचत होगी, उसे सेना को बेहतर साज़ो-सामान उपलब्ध कराने में लगाया जाएगा."
ब्रिगेडियर सत्ती ने ये भी साफ किया कि नौ प्रतिशत की इस कटौती से सेना की सैन्य क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
माना जा रहा है कि पाकिस्तान और भारत के सुधरते संबंधों को देखते हुए ही इस तरह का फैसला लिया गया है.
हाल ही में पाकिस्तानी सीनेट ने एक नया कानून पास किया था जिसके तहत देश के इतिहास में पहली बार राजनीति में सेना के स्थान को एक तरह से मान्यता मिल गई.
इस कानून के तहत चार वरिष्ठ सेना अधिकारियों समेत 13 सदस्यों की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति गठित की गई है.
इस समिति को वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं के साथ बैठने का अधिकार दिया गया है. ये समिति सरकार को सुरक्षा और अन्य अहम मसलों पर सलाह देगी.
हालाँकि विपक्षी सांसदों ने इस बिल की आलोचना की थी. उनका मानना था कि इस कानून का पास होना देश में 'स्थाई मार्शल लॉ' लागू करने जैसा होगा.