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श्रीनगर में प्रचार समाप्त

सैकड़ों सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में, कँटीले तारों की घेराबंदी के बीच श्रीनगर लोकसभा सीट के लिए प्रचार अभियान शनिवार की शाम समाप्त हो गया.

श्रीनगर से उम्मीदवार उमर अब्दुल्ला अपनी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस की सुर्ख़ लाल रंग की पोटी पहनकर पहले नगाम और फिर चरारे शरीफ़ पहुँचे जहाँ उन्होंने लगभग चार हज़ार लोगों की भीड़ के सामने जोशीला भाषण दिया.

लेकिन लोगों का भरपूर मनोरंजन राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और उमर के पिता फारुख़ अब्दुल्ला ने किया, उन्होंने आवाज़ पतली करके राज्य में सत्ताधारी पार्टी की नेता महबूबा मुफ़्ती की नक़ल उतारी.

“जीतेगा एनसी” के नारे के साथ लकड़ी के मंच पर फ़ारुख़ अब्दुल्ला इस तरह कूद रहे थे कि मुझे लगा कि मंच कहीं गिर न जाए, उन्होंने भाषण कम दिया और राज्य के मुख्यमंत्री और उनकी बेटी का मज़ाक ज़्यादा उड़ाया.

नगाम से चरारे शरीफ़ के लगभग आठ किलोमीटर के रास्ते में सैकड़ों लोग सिर पर लाल कपड़ा बाँधे, झंडे लिए उमर अब्दुल्ला के समर्थन में नारे लगा रहे थे.

लगभग पचास महिलाओं और लड़कियों का जत्था भी था जो नेशनल कॉन्फ्रेंस के समर्थन में कश्मीरी गीत गाता हुआ चला जा रहा था.

पीडीपी

उमर अब्दुल्ला और फ़ारुख़ अब्दुल्ला की बाप-बेटे की जोड़ी के मुक़ाबले महबूबा मुफ्ती और मुफ्ती मोहम्मद सईद की जोड़ी भी मैदान में उतरी.

पीडीपी की रैलियों में उस तरह की भीड़ नहीं दिखाई दी जैसी बाप-बेटे की दोनों रैलियों में थी.

इन रैलियों में मुख्यमंत्री और उनकी बेटी ने राज्य सरकार की उपलब्धियों को गिनवाया और लोगों से नए वादे किए.

मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने ज़ोर देकर कहा कि कश्मीर मसले का हल बातचीत से संभव है और “गुमराह करने वाले लोगों की बातों में नहीं आना चाहिए.”

आरोप

दूसरी ओर, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फ़ारुख़ अब्दुल्ला ने केंद्र की वाजपेयी सरकार पर आरोप लगाया कि वह फिर वही ग़लती दोहरा रही है, “निर्दोष लोग मारे जा रहे हैं, यह सब नहीं रुका तो वाजपेयी को अगले सौ वर्ष तक पछताना होगा.”
श्रीनगर में चुनावी रैल
श्रीनगर में हुई चुनावी रैलियों में भीड़ उमड़ी और लोगों ने कँटीले बाड़ के पीछे से ही इसमें हिस्सा लिया

इतना ही नहीं, फ़ारुख़ अब्दुल्ला ने कहा कि केंद्र में तीसरे मोर्चे की सरकार बनेगी और नेशनल कॉन्फ्रेंस उनका साथ देगी, उन्होंने दावा किया उनकी पार्टी राज्य की छह में से पाँच सीटें ज़रूर जीतेगी.

इस तरह नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अपनी राजनीति में एक और पलटी मारी है, ज़्यादा समय नहीं हुआ जब उमर अब्दुल्ला वाजपेयी सरकार में मंत्री थे.

श्रीनगर लोकसभा सीट के लिए 26 अप्रैल को मतदान होगा और यहाँ उमर अब्दुल्ला का मुक़ाबला पीडीपी के उम्मीदवार गुलाम नबी लोन से है.

लोन को मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद का क़रीबी समझा जाता है लेकिन उन्हें उमर अब्दुल्ला की टक्कर में बहुत मज़बूत उम्मीदवार नहीं माना जा रहा है.