पाकिस्तानी सेना का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान से लगे सीमावर्ती इलाक़े दक्षिणी वज़ीरिस्तान में क़बायली सरदारों के साथ समझौता हो गया है और अब उनके ख़िलाफ़ अभियान नहीं चलाया जाएगा.
इन क़बायलियों पर आरोप था कि वे तालेबान और अल क़ायदा के लड़ाकों को पनाह दे रहे थे.
अब पाकिस्तानी सेना ने कहा है कि दक्षिणी वज़ीरिस्तान के क़बायलियों के साथ यह समझौता हुआ है कि दोनों पक्ष तमाम मुद्दे शांति के साथ हल करने की कोशिश करेंगे.
दो सांसदों की मध्यस्थता से यह समझौता हुआ है.
अधिकारियों का कहना है कि इस समझौते के बाद अब इस इलाक़े में लड़ाई बंद हो गई है.
ग़ौरतलब है कि इस इलाक़े में पिछले महीने व्यापक अभियान चलाया गया था जिसमें सेना का कहना है कि कम से कम 100 से ज़्यादा चरमपंथी और सैनिक मारे गए थे.
उस अभियान में एक बार तो यह भी कहा गया था कि अल क़ायदा नेता ओसामा बिन लादेन का दाहिना हाथ कहे जाने वाले अयमन अल ज़वाहिरी भी घिरे हो सकते हैं लेकिन बाद में ऐसी ख़बरें सिर्फ़ अफ़वाहें ही साबित हुईं.
इस्लामाबाद में बीबीसी संवाददाता पॉल एंडरसन का कहना है कि अमरीका पाकिस्तानी क्षेत्र में ऐसे अभियान के बारे में पाकिस्तान पर ही भरोसा कर रहा था.
जबकि अफ़ग़ान सीमा में अमरीकी सेनाएं ऐसा अभियान चला रही थीं जिसे उन्हें सधा हुआ अभियान क़रार दिया.
मुलाक़ात
पाकिस्तानी सेना की पेशावर कोर के कमांडर लैफ़्टिनेंट जनरल सफ़्दर हुसैन और सांसद मौलाना मेराजुद्दीन दोनों ने ही यह पुष्टि की कि दक्षिणी वज़ीरिस्तान में टकराव को रोकने के बारे में व्यापक सहमति हो गई है.
![]() समझौता काफ़ी चौंकाने वाला है |
पेशावर में बीबीसी संवाददाता रहीमुल्ला युसुफ़ज़ई का कहना है कि इस समझौते को शुक्रवार को एक क़बायली जिरगा में औपचारिक मंज़ूरी दी जाएगी.
लैफ़्टिनेंट जनरल सफ़्दर हुसैन भी इस जिरगा में पहली बार उन क़बायलियों से रूबरू होंगे जिन पर अल क़ायदा और तालेबान के लड़ाकों को पनाह देने का आरोप लगाया जाता है.
क़बायलियों का जो प्रतिनिधिमंडल इस जिरगा में भाग लेगा उनमें वे पाँच लोग भी शामिल होंगे जिन्हें अति वाँछित पाकिस्तानी बताया गया है.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच यह समझौता काफ़ी चौंकाने वाला है क्योंकि दोनों ही पक्ष पिछले महीने के ख़ूनी संघर्ष के बाद फिर से लड़ाई के लिए कमर कसे हुए थे.