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वज़ीरिस्तान में नए अभियान की तैयारी?

पाकिस्तान के दक्षिण वज़ीरिस्तान के लोगों का कहना है कि वहाँ नए सिरे से सैनिक तैनात किए जा रहे हैं.

सैनिकों की उपस्थिति से यह अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि अल क़ायदा के ख़िलाफ़ शायद नए अभियान की तैयारी हो रही है.

हालाँकि सैनिक अधिकारियों का कहना है कि सैनिकों को उस इलाक़े में भेजना एक नियमित कार्रवाई है.

उन्होंने इससे भी इनकार किया है कि इलाक़े में कोई नयी कार्रवाई शुरू की जा सकती है.

पिछले महीने इस इलाक़े में पाकिस्तान की सैनिक कार्रवाई में 100 से ज़्यादा लोग मारे गए थे.

वैसे इस इलाक़े में कबीले के वरिष्ठ लोग निवासियों को इस बात के लिए मनाने की कोशिश कर रहे हैं कि वे विदेशी चरमपंथियों को पनाह न दें.

तैनाती

सैनिकों की तैनाती के बारे में दक्षिणी वज़ीरिस्तान के एक निवासी का कहना है, "पिछले तीन दिनों से वाना में भारी हथियारों से लैस सैनिक आ रहे हैं. हमने इस इलाक़े में इससे पहले इतनी बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती नहीं देखी है."

पेशावर से बीबीसी संवाददाता हारून रशीद का कहना है कि सैनिकों के उस इलाक़े में पहुँचने के साथ-साथ जनजातीय नेता वहाँ और ख़ून-ख़राबा टालने की कोशिश कर रहे हैं.

ये लोग तीन स्थानीय कबीलाई सरदारों से मिल रहे हैं जिन पर आरोप है कि उन्होंने अल क़ायदा के चरमपंथियों को पनाह दी है.

एक जनजातीय नेता मालिक क़दीर ख़ान ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल इन सरदारों को समर्पण करने को कह रहे हैं.

शर्त

सरदारों से ये भी कहा जा रहा है कि या तो वे इस इलाक़े को छोड़ दे या फिर ये भरोसा दें कि वे चरमपंथियों को पनाह नहीं देंगे.

इलाक़े के जनजातीय नेता ख़ून-ख़राबा रोकने की कोशिश कर रहे हैं

क़दीर ख़ान ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताय,"अगर ये सरदार इन शर्तों को मानने से मना करते हैं तो हम उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करेंगे."

पाकिस्तानी अधिकारियों ने इन जनजातीय नेताओं को 20 अप्रैल तक विदेशी चरमपंथियों को सौंपने की समयसीमा दी है.

माना जा रहा है कि इस इलाक़े में चेचेन, अरब और उज़बेक चरमपंथी पनाह लिए बैठे हैं.

राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने प्रण किया है कि वे इस इलाक़े को विदेशी चरमपंथियों से छुटकारा दिला कर रहेंगे.

मुशर्रफ़ का कहना है कि यही चरमपंथी पाकिस्तान में हो रहे हमलों और ख़ुद उन पर हो चुके जानलेवा हमले के पीछे हैं.