श्रीलंका में तमिल चरमपंथी संगठन एलटीटीई और सेना के बीच बातचीत हुई है.
बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने कहा कि वे दो साल पुराने संघर्षविराम समझौते को बनाए रखना चाहते हैं.
पिछले दिनों एलटीटीई में फूट के बाद पहली बार दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई है.
इसे एलटीटीई और सरकार के बीच सकारात्मक पहल के रूप में भी देखा जा रहा है.
इसी सप्ताह एलटीटीई और उससे अलग हुए कर्नल करूणा गुट के बीच संघर्ष के बाद कर्नल करुणा को अपने नियंत्रण वाले इलाक़े से हटना पड़ा.
अंतरराष्ट्रीय शांति पर्यवेक्षकों का मानना है कि देश के पूर्वी हिस्से में एलटीटीई के नए कमांडर रमेश ने ही श्रीलंका सरकार के साथ इस बातचीत की पेशकश की.
गश्त शुरू
सोमवार को कर्नल करूणा के समर्थकों के भागने के बाद रमेश ने इलाक़े का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया था.
शांति पर्यवेक्षकों को उम्मीद है है कि इस बातचीत के बाद बट्टिकलोआ के आसपास कर्नल करूणा के नियंत्रण वाले इलाकों में गश्त फिर से शुरू कर दी जाएगी.
अभी तक केवल उत्तरी इलाक़ों में ही गश्त दोबारा शुरू की गई है.
श्रीलंका सेना के ब्रिगेडियर अमारातुंगा का कहना है कि इस बातचीत का उद्देश्य तमिल विद्रोही के नये नेता से पहचान करना और इलाक़े में सुरक्षा व्यवस्था को सामान्य करना है.
बच्चों की वापसी
विद्रोहियों की एक समर्थक वेबसाइट के मुताब़िक तमिल टाइगरों ने पूर्वी क्षेत्र में एलटीटीई की सेना में शामिल सभी बच्चों को वापस उनके माता-पिता को सौंप दिया है.
हाल ही में रिहा किए गए 269 युवा सैनिकों में से 150 सैनिक 18 साल की उम्र से कम के थे.
उधर बट्टिकलोआ में, उत्तर से आने वाले जाफना के तमिल व्यापारी धीरे-धीरे अपने काम पर वापस लौट रहे हैं और अपनी दुकानें फिर खोलने लगे हैं.
इन व्यापारियों को 15 दिन पहले कर्नल करूणा ने इलाक़े से निकाल दिया था.
नोर्वे के शाँति मध्यस्थों ने भी पूर्व में युद्धविराम के बाद अपना काम दोबारा शुरू कर दिया है.
अब जबकि स्थिति में सुधार होता नज़र आ रहा है राष्ट्रपति कुमारतुंगा के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि वे चुनावों के दौरान किए गए अपने वादे को पूरा कर एलटीटीई के साथ शाँति प्रक्रिया को आगे बढ़ाएँ.