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कर्नल करूणा को खोज रही है एलटीटीई

श्रीलंका के तमिल विद्रोही देश के पूर्व में संगठन से टूट कर बने विरोधी धड़े के कमांडर कर्नल करुणा को तलाश कर रहे हैं.

इस सप्ताहांत कर्नल करूणा के समर्थकों और एलटीटीई के दूसरे गुट के बीच ज़बरदस्त लड़ाई हुई थी जिसके बाद से एलटीटीई विद्रोहियों को कर्नल करुणा का कोई सुराग़ नहीं मिल सका है.

देश के पूर्वी भाग में अब तमिल टाइगरों का फिर से पूरा-पूरा नियंत्रण हो गया है और उन्होंने अपने घरों को छोड़ कर भागे लोगों से कहा है कि वे बिना किसी भय के अपने घरों को वापस लौट आएँ.

कर्नल करुणा ने पिछले महीने तमिल टाइगरों के मुख्य संगठन से टूट कर अपना अलग धड़ा बना लिया था और पिछले शुक्रवार को दोनों गुटों के बीच लड़ाई भड़क उठी थी.

मौत की धमकी

तमिल टाइगरों की वेबसाइट पर रिपोर्ट है कि कर्नल करुणा के सभी ठिकानों को तलाश कर लिया गया है जिनमें मीनाहाम का उनका सबसे बड़ा ठिकाना भी शामिल है.

सोमवार को कर्नल करुणा के समर्थकों के तितर-बितर होने के बाद से ही कर्नल करुणा का बाहरी विश्व से कोई संपर्क नहीं हुआ है.

श्रीलंका सरकार का कहना है कि अगर कर्नल करुणा ने उससे शरण माँगी तो उन्हें शरण दी जाएगी.

लेकिन रक्षा सचिव सिरिल हेरात ने मीडिया की इन रिपोर्टों का खंडन किया है कि सरकार कर्नल करुणा को पहले ही शरण दे चुकी है.

हेरात ने कहा,"हमें उनका कोई संदेश नहीं मिला है. वे बिल्कुल अपनी मर्ज़ी के मालिक हैं."

मौत की धमकी

पूर्वी श्रीलंका में एलटीटीई की राजनीतिक शाखा के अध्यक्ष ने कहा है कि लोगों को बग़ैर भय केअपने घरों को वापस लौट जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि केवल कर्नल करुणा को ही संगठन से निष्कासित किया गया है.

कोलंबो में बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ऐसा समझा जा रहा है कि एलटीटीई का ये बयान कर्नल करुणा के लिए मौत की धमकी है.

कोलंबो में एक स्वतंत्र विचार-मंच के अध्यक्ष, डॉक्टर पाइकियासौथी सर्वनमुट्टू के अनुसार आम माफ़ी की पेशकश के बावजूद कर्नल करुणा के वरिष्ठ कमांडरों को ख़त्म किया जा सकता है.

तमिल टाइगरों ने इसके पहले ग़द्दार समझनेवालों को माफ़ नहीं किया है.