पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा है कि उन्होंने इस बारे में अभी कुछ फ़ैसला नहीं किया है कि वह सेनाध्यक्ष का पद इस साल के अंत तक छोड़ देंगे या नहीं.
पहले उन्होंने कहा था कि वह इस बारे में इस साल के दिसंबर तक कोई फ़ैसला कर सकते हैं.
परवेज़ मुशर्रफ़ ने बीबीसी वर्ल्ड टेलीविज़न के हार्डटॉक कार्यक्रम में ये बात कही. इस कार्यक्रम का प्रसारण बुधवार को होगा.
इसके पहले मुशर्रफ़ ये कहते रहे हैं कि वह इस साल दिसंबर तक सेना प्रमुख का पद छोड़ देंगे और एक नागरिक के तौर पर राष्ट्रपति के पद पर बने रहेंगे.
बीबीसी के इस्लामाबाद संवाददाता ज़फ़र अब्बास का कहना है कि देश की अनिश्चित राजनीतिक और सुरक्षा स्थिति को ध्यान में रखते हुए जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने अपने विकल्प खुले रखे हैं.
राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के इस तरह के बयानों से राजनीतिक हलकों में हलचल शुरू हो गई है.
सेनाध्यक्ष का पद छोड़ने के सार्वजनिक वादे का बावजूद वह इस पद को छोड़ने के लिए इसलिए तैयार नहीं नज़र आ रहे हैं क्योंकि सत्ताधारी गठबंधन ने उनसे सेनाध्यक्ष पद पर बने रहने का अनुरोध किया है.
सोमवार को सत्ताधारी गठबंधन मे शामिल एक पार्टी के आठ सांसदों राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ से औपचारिक अनुरोध किया था कि देश की राजनीतिक और सुरक्षा स्थिति को ध्यान में रखते हुए वह दोनों पद अपने ही पास रखें.
बीबीसी के कार्यक्रम में परवेज़ मुशर्रफ़ से बार-बार यह पूछा गया कि क्या वह दिसंबर तक सेनाध्यक्ष का पद छोड़ने के बारे में गंभीर हैं लेकिन परवेज़ मुशर्रफ़ ने इस सवाल का कोई सीधा जवाब नहीं दिया.
इसके उलट उन्होंने इस्लामी पार्टियों के गठबंधन मुत्तहिदा मजलिसे अमल (एमएमए) की यह कहते हुए आलोचना की कि वे अपनी ज़िम्मेदारियों को सही तरीक़े से नहीं निभा रहे हैं जिसकी वजह से उन्हें यह घोषणा करनी पड़ी कि वे सेनाध्यक्ष का पद दिसंबर तक छोड़ देंगे.
हालाँकि पिछले साल एक संवैधानिक संशोधन में राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को संसद को भंग करने के अतिरिक्त अधिकार दिए गए हैं लेकिन उनकी असली ताक़त सेना से ही उन्हें मिलती है.
लेकिन क़ानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह दिलचस्प होगा कि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ इस मुश्किल स्थिति से किस तरह बाहर निकलते हैं क्योंकि संवैधानिक संशोधन में यह साफ़-साफ़ लिखा है कि उन्हें 2004 के अंत तक दोनों में से कोई एक पद छोड़ना होगा.
सूचना मंत्री शेख़ रशीद अहमद ने कहा है कि उन्हें पूरा भरोसा है कि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ इस साल के आख़िर तक सेनाध्यक्ष का पद छोड़ देंगे.