भारत की जानी-मानी सॉफ़्टवेयर कंपनी इंफ़ोसिस का कारोबार एक अरब डॉलर से ज़्यादा हो गया है.
अमरीका के प्रख्यात नैसडैक शेयर बाज़ार की सूची में शामिल किसी भारतीय कंपनी ने पहली बार एक अरब डॉलर से ज़्यादा का कारोबार किया है.
कंपनी के कारोबार के साथ-साथ उसके शुद्ध लाभ में भी वृद्धि हुई है.
2003 में कंपनी का मुनाफ़ा 9 अरब 60 करोड़ रूपए था जो अब बढ़कर 12 अरब 40 करोड़ रूपए (28 करोड़ डॉलर) हो गया है.
इंफ़ोसिस के सालाना कारोबार में भी 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.
इंफ़ोसिस के मुख्य कार्यकारी और महानिदेशक नंदन निलकानी ने कंपनी के सालाना नतीजे घोषित करते हुए बताया,"हमने पिछले एक साल में एक अरब डॉलर के कारोबार की सीमा पार कर लिया है. 1999 में हमारा कारोबार 12 करोड़ 10 लाख डॉलर का था जो अब बढ़कर एक अरब छह करोड़ डॉलर हो गया है".
इंफ़ोसिस के नतीजों की घोषणा से शेयर बाज़ार में कंपनी के शेयरों की कीमतें काफ़ी ऊपर चली गईं.
इंफ़ोसिस की सफलता
दो दशक पहले इंफ़ोसिस की शुरूआत सात लोगों ने मिलकर की थी जिनका नेतृत्व एन आर नारायणमूर्ति ने किया था.
केवल साढ़े बारह हज़ार रूपए की पूंजी से शुरू हुई इस कंपनी में आज 25,000 लोग काम करते हैं और उसके दफ़्तर केवल भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर में हैं.
इंफ़ोसिस, भारतीय सॉफ़्टवेयर जगत में टाटा कंसल्टेंसी सर्विस के बाद एक अरब डॉलर के कारोबार तक पहुँचने वाली दूसरी कंपनी है.
मगर टाटा नैसडैक की सूची में नहीं है.
टाटा और इंफ़ोसिस के बाद भारत की तीसरी सॉफ़्टवेयर कंपनी विप्रो के बारे में अनुमान लगाया जा रहा है कि जल्दी ही उनके कारोबार के भी एक अरब डॉलर तक पहुँचने की घोषणा होगी.
विप्रो के शेयर न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज की सूची में शामिल हैं.