जम्मू क्षेत्र में पाकिस्तान के साथ लगे सीमावर्ती गाँवों में इस बार चुनाव शांत माहौल में हो रहे हैं. पिछले कई वर्षों में ऐसा पहली बार हो रहा है कि लोग संघर्षविराम के दौरान लोग चुनाव में भाग ले रहे हैं.
इससे पहले के चुनाव के दौरान सीमा पर गोलीबारी का सिलसिला जारी था, जिसके चलते चुनाव की तमाम गतिविधियों के साथ ही प्रचार में भी ख़लल पड़ता था.
वर्ष 2002 के चुनाव में तो स्थिति अभूतपूर्व थी क्योंकि उस वक्त सीमा पर भारी सैनिक जमावड़ा था.
पिछले चुनाव के माहौल के बारे में जब स्थानीय लोगों से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि उस समय जमकर गोलीबारी हो रही थी, कोई प्रचार नहीं हो पा रहा था और कई लोग तो इसलिए वोट डालने नहीं गए क्योंकि कभी भी गोली लग सकती थी.
बदला है माहौल
लेकिन अब भारत-पाक के बीच संघर्ष विराम के कारण माहौल में काफी बदलाव आया है.
हालाँकि इन गांवों में शहरों जैसी चुनाव प्रचार की गहमा-गहमी नहीं है लेकिन लोग वोट डालने के लिए उत्साहित हैं.
एक ग्रामीण ने बताया कि इस बार सभी लोग वोट डालने जाएँगे क्योंकि लोग बहुत खुश हैं और संघर्ष विराम की वजह से माहौल शांत है.
लोगों को इस बार पहले की तरह वोट डालने के लिए भीतर के सुरक्षित गांवों में नहीं जाना पड़ेगा.
सीमा के बिल्कुल साथ वाले गाँवों में भी इस बार मतदान केंद्र खोले जाएँगे.
लोगों के मुताबिक सबसे बड़ी बात तो यह है कि मतदान के समय लोगों के मन में सीमापार की गोलीबारी का भय नहीं होगा.
संघर्षविराम का लाभ उठाते हुए गांवों में लोग अपनी खेतीबाड़ी और मजदूरी के काम में लगे हुए हैं.
लोगों के मन में चुनाव प्रचारकों का उनके क्षेत्रों तक न पहुँचने को लेकर कोई रोष नहीं है बल्कि वे इस अच्छे और शांत माहौल को लेकर बहुत खुश और उत्साहित हैं.