भारत के अटॉर्नी जनरल सोली सोराबजी ने कहा है कि चुनावी जनमत सर्वेक्षणों और एक्ज़िट पोल के प्रकाशन पर मतदान के पहले रोक लगाना संविधान का उल्लंघन होगा.
इसके बाद केंद्र सरकार ने चुनाव आयोग को लिखकर दे दिया है कि वह संविधान के तहत अध्यादेश जारी करके जनमत सर्वेक्षणों और एक्ज़िट पोल के प्रकाशनों पर रोक नहीं लगा सकता.
समाचार एजेंसियों का कहना है कि केंद्र सरकार ने अंतिम निर्णय का फ़ैसला चुनाव आयोग पर ही छोड़ दिया है.
पिछले दिनों चुनाव आयोग के साथ हुई बैठक में सभी राजनीतिक दलों ने सर्वसम्मति से फ़ैसला किया था कि जनमत सर्वेक्षणों और एक्ज़िट पोल पर एक अध्यादेश जारी कर रोक लगा देनी चाहिए.
इसके बाद चुनाव आयोग ने केंद्रीय क़ानून मंत्रालय से राय माँगी थी.
चुनाव आयोग को अपनी राय देने से पहले केंद्र सरकार ने एटॉर्नी जनरल की राय ली थी.
एटॉर्नी जनरल ने कहा है कि संविधान की धारा 19/2 में यह प्रावधान है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के कुछ मामलों में रोक लगाई जा सके लेकिन इस धारा के प्रावधानों के तहत जनमत सर्वेक्षणों और एक्ज़िट पोल पर रोक नहीं लगाई जा सकती.
उनका कहना था कि इससे नागरिकों के अभिव्यक्ति के अधिकारों का हनन होगा.
दूसरी ओर कांग्रेस प्रवक्ता और सुपरिचित वकील कपिल सिब्बल का कहना है कि संविधान की धारा 324 के तहत चुनाव आयोग चाहे तो चुनावी सर्वेक्षणों पर तुरंत रोक लगा सकता है.
अभी चुनाव आयोग का फ़ैसला आना शेष है. हालांकि माना जा रहा है कि आयोग केंद्रीय क़ानून मंत्रालय की राय के अनुसार ही चलेगा.
कांग्रेस की मीडिया से शिकायत
![]() कांग्रेस नेताओं ने पत्रकारों से अपील की कि वे पार्टी की ख़बरें प्रकाशित और प्रसारित करें |
देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस इन दिनों इस बात से परेशान है कि उसकी बातें न टीवी वाले ठीक तरह से दिखा रहे हैं और न अख़बार ही ठीक से छाप रहे हैं.
और यह शिकायत कोई दबी छिपी शिकायत नहीं है. इसके लिए बाक़ायदा पार्टी के दो वरिष्ठ नेता मनमोहन सिंह और प्रणव मुखर्जी पार्टी की नियमित पत्रकार वार्ता में आए और पत्रकारों से अपील की कि वे कांग्रेस की ख़बरें छापें-दिखाएँ.
उनका तर्क था कि जनता तक सभी पक्षों की ख़बरें पहुँचनी चाहिए.
ये दोनों नेता तो जल्दी चले गए लेकिन बाद में प्रवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि पत्रकार तो ख़बर लिख रहे हैं लेकिन कहीं 'दबाव' ज़रुर है.
उनका कहना था कि लंबे समय से कांग्रेस के साथ ऐसा हो रहा है. उन्होंने यह भी माना कि अख़बारों में एक तरह की सेंसरशिप चल रही है.
कपिल सिब्बल ने माना कि यह आर्थिक उदारीकरण का भी असर हो सकता है.
हालांकि पत्रकारों को भी कांग्रेस से बहुत सी शिकायतें थीं और नेताओं ने आश्वासन दिया कि कमियाँ दूर की जाएँगी.