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सारे रोड़पति करोड़पति हो गए...

(बिंदास बाबू की डायरी)

बीबीसी के श्रोताओं को बिंदास बाबू की एक ठो हैलो, हाय-हाय, राम-राम, सलाम, सत श्री अकाल.

जिगर थाम कर सुनना दोस्तों, इन चुनावों में एक बात तो साफ़ हो गई है कि अपने यहाँ से ग़रीबी नाम की वस्तु ग़ायब हो गई है.

अपने सारे तोप-तमंचे कैन्डीडेट, जो कल तक रोडपति थे, इन दिनों करोड़पति हो गए हैं.

‘क्या कहते हो बिंदास बाबू,’ पगलैट रामभरोसे ने पूछ ही लिया.

"देखो न, मायावती ने पर्चा भरा, बताया कि वो करोड़पति हैं. सोनिया ने भी कहा कि वो करोड़पति के आसपास हैं. अपने आडवाणी जी ने भी कहा कि वो करोड़पति हैं. गोविंदा ने तो कहा ही है कि वो करोड़पति हैं. धर्मेन्द्र भी कहेंगे कि वो करोड़पति हैं."

हमने रामभरोसे को भरोसा दिलाया कि देश से ग़रीबी बहुत-बहुत दूर चली गई है. जिधर देखो करोड़पति टहल रहे हैं, लखपतियों की मौज-बहार है. एनआरआई तो पहले भी अपने यहाँ अरबपति थे, अब आरआई भी करोड़पति होने लगे हैं.

'अरे, आप जलते हैं बिंदास बाबू, जहाँ इतना विकास हो, वहाँ करोड़ी पुरुषों की क्या कमी, अरे यही तो शाइनिंग है. ये मुल्क क्या दमड़ी-लालों के हाथ छोड़ोगे.'

अरे, जिसके पास खाने को कुछ नहीं है, वो सारे राष्ट्र को खा जाएगा, और जिसके पास सेवाभाव के लिए सबकुछ है, घर के भीतर अमीरी है, वो सिर्फ़ सेवा के लिए आएंगे.

'जो करोड़पति है, वही ईमानदार होगा, जो ख़ुद ही मरभुख है, वो तो खुद ही खा जाएगा और दूसरे को खाने न देगा. भ्रष्ट तो ज़रूर ही होगा.’ रामभरोसे ने तर्क का तख़्ता पलट दिया.

'जब ये सारे करोड़पति-लखपति हुए तो ग़रीब कौन रहा रामभरोसे जी. तब विकास भाई किसका विकास करेंगे,' हमने पूछा.

अरे, विकास भाई विकास का विकास करेंगे? और किसका विकास करेंगे! जिसका विकास होता है, उसी का आकाश होता है. लखपति से करोड़पति, करोड़पति से अरबपति.

बस एक अफ़सोस है, ये जो लालू के साला जी साधू साहब हैं, उन्होंने बंटाधार कर दिया, खुद को ग़रीबी की रेखा के ठीक नीचे ले गए हैं.

सिर्फ 50 ग्राम सोना बताते हैं. सचमुच ग़रीब दिखते हैं. उनका सोच खाए जाता है, हमसे तो नहीं देखा जाता.

तो हे श्रोताओं, आप ग़रीबी की रेखा के ऊपर आ जाओ, कहो कि तुम लखपति हो, करोड़पति हो, अरबपति हो.

और ये जो साधू यादव है न, सारे बिहार की नाक कटाई दिया है. अरे, अपनी बहन से थोड़ा बहुत ले लेता तो कुछ काम तो चल जाता.

अच्छा भइया, नमस्कार.