भारत सरकार की एक न्यायिक समीक्षा समिति ने तमिलनाडु की एमडीएमके पार्टी के नेता वाइको के ख़िलाफ़ लगे आतंकवाद संबंधित आरोप ख़ारिज कर दिए हैं.
तमिलनाडु की राज्य सरकार ने उनके ख़िलाफ़ आतंकवाद निरोधक क़ानून (पोटा) के तहत ये आरोप लगाए थे.
वे पहले ऐसे सांसद थे जिन्हें इस क़ानून के तहत गिरफ़्तार किया गया था.
उन्हें इस क़ानून के तहत गिरफ़्तार किया गया था और 19 महीने साल में रहने के बाद वे इस साल फ़रवरी में ज़मानत पर रिहा किए गए थे.
उनके ख़िलाफ़ आरोप था कि उन्होंने श्रीलंका के तमिल चरमपंथी गुट एलटीटीई को समर्थन दिया.
वाइको की पार्टी कुछ महीने पहले तक राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार का हिस्सा थी.
लेकिन हाल में एमडीएमके ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से नाता तोड़ लिया और अब तमिलनाडु में काँग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा है.
वाइको इन चुनावों में अपनी गिरफ़्तारी और पोटा के दुरुपयोग को चुनावी मुद्दा बना रहे हैं.
न्यायिक समीक्षा समिति ने वाइको के आठ सहयोगियों पर लगे आरोप भी ख़ारिज कर दिए हैं.