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उत्तरांचल में दो पुराने फौजी आमने सामने

चुनाव जंग से कम नहीं होता और अगर दो रिटायर्ड फौजी अफसर आमने-सामने हों तो क्या कहने.

उत्तरांचल की पौड़ी लोकसभा सीट पर भारत के सड़क परिवहन मंत्री मेजर जनरल भुवन चंद खंडूरी के मुकाबले में कांग्रेस ने राज्य के पर्यटन मंत्री लेफ्टिनेंट जनरल तेजपाल रावत को चुनाव मैदान में उतारा है.

पौड़ी में पहले ये माना जा रहा था कि हमेशा कि तरह सतपाल महाराज ही काँग्रेस के प्रत्याशी होंगे लेकिन इस बार उन्होंने अपनी दावेदारी छोड़ दी.

खंडूरी पौड़ी से तीन बार सांसद रहे हैं. बीजेपी ने उन्हें ये सोचकर टिकट थमाया था कि ब्राह्मण मतों के साथ-साथ फौजी वोट भी हासिल होगा.

अब काँग्रेस ने भी यही दाँव चला है. तेजपाल रावत सेना में खँडूरी से ऊपर रहे हैं और उनकी ही तरह साफ छवि के हैं. इस तरह ये लड़ाई सिर्फ दो फौजियों के बीच ही नहीं बल्कि दो अच्छी छवि वाले नेताओं के बीच भी हो रही है.

सड़कों का जाल बिछाने के लिए जहाँ खंडूरी की तारीफ के पुल बाँधे जा रहे हैं वहीं रावत को भी कामकाज के मामले में अच्छा समझा जाता है.

ले. जनरल रावत
रावत की छवि एक ईमानदार नेता की है

रावत राज्य में पर्यटन के साथ-साथ सैनिक कल्याण मंत्री भी हैं और उन्होंने जो सैनिक भर्ती रैलियाँ आयोजित करवाई हैं जो लोकप्रिय रही हैं.

यूँ तो पौड़ी एक तरह से खँडूरी का गढ़ बन गया है मगर दो साल पहले हुए विधानसभा चुनाव में पौड़ी की दस में से आठ सीटों पर बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था.

रावत अपने पक्ष में यही गणित पेश करते हैं. उनका कहना है कि "वैसे तो इन चुनावों में मुद्दा अच्छी सरकार का ही है लेकिन फौज भी एक मसला रहेगा. बीजेपी ने जैसे समाज को बाँट दिया है वैसे ही फौज को भी."

फौजी मुद्दा

वे कहते हैं कि कारगिल के शहीदों को तो पेट्रोल पंप और गैस एजेंसी सहित 20 से 30 लाख का मुआवजा दिया जा रहा है लेकिन उनके बगल में दूसरे सेक्टर में रोज़ मारे जा रहे सैनिकों को कोई नहीं पूछ रहा.

उधर खंडूरी इस चुनाव को फौजी रंग देना नहीं चाहते. उनका कहना है कि ”विरोधियों की जो भी रणनीति रही हो फौजी और नॉन फौजी कुछ नहीं होता. असल तो विकास है.”

अपने जनसंपर्क अभियानों में खंडूरी व्यापारियों, महिलाओं, कर्मचारियों को अलग-अलग भरोसा दिलाते हैं कि वाजपेयी सरकार की वापसी से उनकी दिक्कतें दूर होंगी.

उनका दावा है कि,” उत्तरांचल में दूरसंचार, रेलवे, शिक्षा और सड़कों का जो विकास मैंने करवाया है उसकी गिनती नहीं है.”

पौड़ी में बड़ी संख्या में ऐसे वोटर हैं जो फौजी या फौजी परिवार के हैं इसलिए नतीजों पर उनका असर होगा.

सैनिक कल्याण समिति के मेजर प्रेमराम डँगवाल कहते हैं,” परिणाम चाहे जो भी हो हमें खुशी है कि जीतेगा तो फौजी ही.”