महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी ने जवाहर लाल नेहरु की किताब 'डिस्कवरी ऑफ़ इंडिया' पर पूरे देश में प्रतिबंध की माँग की है.
यह किताब 'भारत एक खोज' के नाम से हिंदी में उपलब्ध है और इसे भारत के पहले प्रधानमंत्री नेहरु ने 50 साल पहले लिखा था.
भारत के इतिहास को लेकर इसे एक प्रामाणिक और अच्छी किताब के रुप में जाना जाता रहा है लेकिन भाजपा का आरोप है कि इस किताब में शिवाजी पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की गई हैं.
उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में शिवाजी की एक विवादित जीवनी पर प्रतिबंध लगाया है जिसे एक अमरीकी लेखक ने लिखा है.
बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद का कहना है कि लोग मानते हैं कि शिवाजी को लेकर भाजपा की इस माँग के पीछे इतिहास कम है और राजनीति ज़्यादा.
आपत्ति
भाजपा का कहना है कि इस किताब में एक पैराग्राफ़ में शिवाजी पर आपत्तिजनक बातें लिखी गई हैं.
इस माँग के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने भाजपा से माफ़ी की माँगने की माँग की है.
इस आरोप के बाद यह मामला और गहरा गया है कि शिवाजी के बारे में इन कथित विविवादित टिप्पणियों वाली किताब को 1986 में राजीव गाँधी ने जारी किया था.
राजीव गाँधी, जवाहर लाल नेहरु के नाती थे और सोनिया गाँधी के पति.
महाराष्ट्र में कांग्रेस और उससे टूटकर अलग हुई राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी भी शिवाजी समर्थकों को ख़ुश करने की कोशिश करती रही है.
हाल ही में दोनों पार्टियों की साझा सरकार ने अमरीकी लेखक जॉन लीन की किताब पर प्रतिबंध लगाया था. जो शिवाजी की जीवनी है.
राज्य सरकार के इस निर्णय की प्रधानमंत्री ने आलोचना भी की थी.
राजनीतिक मुद्दा
नेहरु की किताब 1940 के दशक में लिखी गई थी.
और कथित रुप से विवादित अंशों वाली किताब बीस साल पहले प्रकाशित हुई थी.
और चार सौ साल पहले बाहरी शासकों से लड़ने वालों में शिवाजी का नाम प्रमुख रुप से दर्ज है.
माराठा नेता के रुप में शिवाजी को पूरे महाराष्ट्र में अलग ही स्थान प्राप्त है और वे वर्तमान राजनीति की धुरी में भी रहे हैं.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इस समय चुनाव का माहौल है और शिवाजी को लेकर विवाद 48 राजनीतिक सीटों पर असर डालने वाला मुद्दा है.