भारत के उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने कहा है कि शांति स्थापना के लिए कश्मीर मुद्दे पर देश पाकिस्तान के साथ "लेन-देन" के लिए भी तैयार है.
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी इन दिनों एक रथयात्रा पर हैं जिसे 'भारत उदय यात्रा' का नाम दिया गया है.
आडवाणी ने यह बयान शुक्रवार को इस यात्रा के दौरान कोयंबटूर में दिया.
"कुछ देशों के बीच कुछ मुद्दों पर तीखे मतभेद हो सकते हैं और अगर वे उन मतभेदों को एक किनारे रखें और लड़ाई को पीछे छोड़ें तो रास्ता निकलता है."
उन्होंने कहा, "दोनों पक्षों को कुछ लेना है तो कुछ देने के लिए भी तैयार रहना पडेगा."
आडवाणी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, "हो सकता है किसी देश ने कुछ कारणों से कोई विशेष रुख़ अपनाए रखा हो लेकिन वह हमेशा उस रुख़ पर अड़ा नहीं रह सकता."
लेकिन यह पूछे जाने पर आडवाणी कुछ सकपका गए कि क्या भारत सरकार जम्मू कश्मीर मसले पर क्या कुछ क्षेत्र की संप्रभुता पर लचीला रुख़ अपनाने के लिए तैयार है.
आडवाणी ने कहा, "जब हम जम्मू कश्मीर मसले पर पाकिस्तान पर कोई बातचीत करेंगे तो संसद के प्रस्ताव को नहीं भुलाया जा सकता."
"बातचीत आगे बढ़ने के बाद ही इस पर विचार किया जा सकता है कि हम कहाँ तक समझौता कर सकते हैं लेकिन इस बारे में विपक्ष से बात करनी होगी और संसद को भी विश्वास में लेना होगा."
आडवाणी ने कहा कि इसके लिए ज़रूरी है कि दोनों पक्ष इच्छुक हों.
प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भी कुछ इसी तरह के विचार प्रकट किए हैं.
वाजपेयी ने शुक्रवार को दिल्ली में कहा, "मैंने बार-बार कहा है कि बदलते हालात और तेज़ी से आगे बढ़ती दुनिया के दौर में हम बीते वक़्त के दायरों में जकड़े नहीं रह सकते."
उन्होंने कहा, "हमें अपने आपसी मतभेद सुलझाने के लिए कुछ नए तरीक़े तो निकालने ही होंगे."
वाजपेयी ने कहा कि इसीलिए हम पड़ोसी देशों के साथ व्यापार, सांस्कृतिक संबंधों और खेल को बढ़ावा दे रहे हैं ताकि मसलों के समाधान के लिए जनसमर्थन हासिल किया जा सके.