जम्मू कश्मीर के ऊपरी सदन में विवादास्पद स्थायी निवासी (अयोग्यता) विधेयक पर साढ़े छह घंटे लंबी बहस के बाद सभापति ने सदन की बैठक अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी है.
विधान परिषद के सभापति अब्दुल राशिद दर ने कहा है कि इस विधेयक पर चर्चा अधूरी है और अब इस पर चर्चा अगले सत्र में होगी.
विधान सभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है जिसके बाद इस पर काफ़ी विवाद छिड़ चुका है.
इस विधेयक का विरोध करने वाले दलों और संगठनों ने विरोध स्वरूप गुरूवार को जम्मू बंद की घोषणा की थी.
अगले सत्र में
पहले कहा जा रहा था कि विधान परिषद में इस विधेयक पर मतदान हो सकता है लेकिन अब इस पर बहस अगले सत्र तक के लिए टाल दिया है.
जम्मू कश्मीर में स्थायी निवासी (अयोग्यता) विधेयक गुरुवार को ही विधान परिषद में पेश किया गया और इस पर साढ़े छह घंटे चली.
![]() कश्मीर में विधेयक के समर्थन में प्रदर्शन |
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी इस पर पुनर्विचार करने के लिए मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद को पत्र लिख चुकी हैं.
सरकार के एक सहयोगी दल पेंथर्स पार्टी ने भी विधान सभा में इस विधेयक को पारित कराने में सहयोग किया था.
पेंथर्स पार्टी के कुल चार विधायक हैं जिनमें से दो मंत्री हैं.
पेंथर्स पार्टी ने सरकार से समर्थन वापसी तक की धमकी दे डाली है.
काँग्रेस माँग कर रही है कि इस विधान परिषद की प्रवर समिति को सौंप दिया जाए.
विधान परिषद की सदस्य संख्या 36 है और कोई भी विधेयक पारित करने के लिए कम से कम 24 सदस्यों का समर्थन ज़रूरी है.
लेकिन इस समय छह स्थान रिक्त हैं.
लेकिन पीडीपी, नेशनल कान्फ्रेंस, मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी को मिलाकर 21 का आँकड़ी ही बैठता है.
इस लिहाज़ से लगता है कि यदि मतदान की नौबत आई तो विधेयक गिर जाएगा.
पीडीपी पहले ही कह चुकी है कि वह इस विधेयक पर कोई समझौता करने के लिए तैयार नहीं है और पारित कराकर ही रहेगी.
बड़ा मुद्दा?
![]() जम्मू में विधेयक के विरोध में प्रदर्शन |
भारतीय जनता पार्टी की राज्य इकाई ने तो इस मुद्दे पर जम्मू को अलग राज्य का दर्जा दिए जाने की अपनी माँग पर आगे बढ़ने की धमकी दे डाली है.
इस विधेयक में व्यवस्था है कि राज्य की स्थायी निवासी कोई महिला अगर किसी दूसरे राज्य के निवासी से शादी करती है तो राज्य का उसका स्थायी निवासी होने का दर्जा ख़त्म हो जाएगा.
इस विशेष दर्जे से कुछ अधिकार जुड़े हुए हैं जिनमें संपत्ति और नौकरी का अधिकार शामिल है.