श्रीलंका में तमिल विद्रोही संगठन एलटीटीई के प्रमुख प्रभाकरण ने संगठन से अलग होनेवाले विद्रोही कर्नल करूणा को माफ़ी देने की पेशकश की है.
मगर साथ ही ये शर्त रखी गई है कि करूणा अपनी सारी गतिविधियाँ तत्काल रोक दें.
एलटीटीई के एक प्रवक्ता ने बीबीसी को इस प्रस्ताव की जानकारी दी.
ये समाचार ऐसे समय आया है जब नॉर्वे के दूत एरिक सोल्हेम श्रीलंका सरकार और एलटीटीई के बीच दो साल पहले हुए संघर्षविराम समझौते की समीक्षा के लिए श्रीलंका पहुँचे हैं.
कर्नल करूणा को पिछले दिनों एलटीटीई से निकाल दिया गया था और वह अभी भी बट्टिकलोआ में ही हैं.
जान का ख़तरा
इस बीच सोमवार को बट्टिकलोआ में अतिरिक्त सुरक्षाबल को तैनात किया गया.
पूर्वी श्रीलंका के बट्टिकलोआ और कई दूसरे शहरों में कर्नल करूणा के समर्थन और एलटीटीई नेताओं के विरोध में प्रदर्शन हुए थे.
इस बीच कर्नल करूणा के एक प्रवक्ता ने एक समाचार एजेंसी से कहा है कि हिंसा को टालने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा.
प्रवक्ता ने कहा,"हम अपनी ज़मीन पर कोई ख़ून-ख़राबा नहीं देखना चाहते मगर ये सब उत्तरी श्रीलंका के नेताओं पर निर्भर करता है".
रविवार को कर्नल करूणा ने कहा था कि उन्हें ऐसी ख़बरें मिली हैं कि उन्हें मारने के लिए मारक दस्ते भेजे गए हैं.