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झुग्गी बस्ती धारावी को सँवारा जाएगा

मुंबई की धारावी एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती है.

धारीदार टीन की चादरों की छत वाली झोपड़ियों में लगभग छह लाख लोग रहते हैं.

लेकिन इसी बस्ती में जो शिल्प-उद्योग विकसित हो गया है उसकी बदौलत साल भर में कोई एक अरब डॉलर यानी लगभग 45 अरब रुपयों का व्यवसाय होता है.

इस बस्ती में चमड़े की चीज़ें, गहने और मिट्टी के सजावटी बर्तन तैयार किए जाते हैं और फिर पश्चिमी देशों के सभी प्रमुख शहरों में बिकने को भेज दिए जाते हैं.

अब अधिकारी चाहते हैं कि धारावी की व्यावसायिक संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए इसे एशिया के सबसे अच्छे इलाक़े में तब्दील कर दिया जाए.

इसके लिए एक बड़ी योजना बनाई गई है जिस पर 1.3 अरब डॉलर यानी कोई साठ अरब रुपए खर्च होने हैं.

सबसे अच्छी बस्ती?

धारावी के कई बच्चे कभी स्कूल नहीं गए.
 धारावी एशिया का सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती कहलाती है और हम ये लेबल हटाना चाहते हैं
 
सुरेश जोशी, हाउसिंग बोर्ड के प्रमुख

लेकिन अब सरकार योजना बना रही है कि वहाँ स्कूल बनाए जाएँ और खेल के मैदान भी.

झोपड़ियों की जगह अच्छे घर बनाने की भी योजना है.

योजना है कि यहाँ ऐसे आधुनिक व्यावसायिक परिसर बना दिए जाएँ जिससे शिल्प-उद्योग को होने वाला लाभ तीन गुना हो जाए.

राज्य के हाउसिंग बोर्ड के प्रमुख सुरेश जोशी कहते हैं, ''धारावी एशिया का सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती कहलाती है और हम ये लेबल हटाना चाहते हैं.''

उनका कहना है, ''हम धारावी को एशिया की सबसे अच्छी बस्ती बनाना चाहते हैं.''

क्या सोचते हैं लोग

सवाल यह है कि धारावी के लोग इस योजना के बारे में क्या सोचते हैं.

चमड़े के व्यापारी मलिक युसुफ़ कहते हैं कि उनका परिवार आज़ादी के पहले से वहाँ रहता है.

उनका ख़ुद का जन्म भी धारावी में ही हुआ.

हालांकि जिस झोपड़ी में वे रहते हैं वह उनके दस सदस्य वाले परिवार के लिए बहुत छोटा है.
 अब वे पाँच हज़ार छह सौ करोड़ रुपया लगाने की बात कर रहे हैं. पता नहीं ये पैसा बस्ती के विकास में लगेगा या नहीं, पैसा हम तक पहुँचेगा या राजनीतिकों के पास
 
राजू चौहान, धारावीवासी

लेकिन यदि सरकार की योजना साकार होती है तो युसुफ़ के परिवार का भविष्य ऐसा हो जाएगा जिसकी कल्पना उनके पुरखों ने तो कम से कम नहीं की होगी.

लेकिन इस योजना से सब लोग युसुफ़ की तरह सहमत और ख़ुश नहीं हैं.

बहुत से लोग मानते हैं कि इस योजना का संबंध कुछ हफ़्तों बाद होने वाले चुनावों से है.

राजू चौहान मिट्टी के बर्तन बनाने का काम करते हैं.

उनका कहना है कि उन्होंने राजनेताओं के बड़े-बड़े वादों को देखा-सुना है.

वे कहते हैं, ''इससे पहले धारावी के लिए सौ करोड़ रुपए रखे गए थे लेकिन वे कहाँ गए पता ही नहीं चला.''

राजू चौहान कहते हैं, ''अब वे पाँच हज़ार छह सौ करोड़ रुपया लगाने की बात कर रहे हैं. पता नहीं ये पैसा बस्ती के विकास में लगेगा या नहीं, पैसा हम तक पहुँचेगा या राजनेताओं के पास.''

लेकिन सुरेश जोशी कहते हैं कि इस योजना का चुनावों से कोई लेना देना नहीं है.

वे कहते हैं, ''यह योजना एक-सवा एक साल से बन रही है. दरअसल इतनी बड़ी योजना पर काम करने से पहले हम चाहते थे कि इस पर बड़े पैमाने पर विचार विमर्श कर लिया जाए.''

प्राथमिकता

लेकिन धारावी के लोग इसे इतनी आसानी से मानते दिखते नहीं हैं.
एक झुग्गी बस्ती
मुंबई की जनसंख्या का बड़ा हिस्सा झुग्गियों में ही गुज़ारा करता है

स्थानीय पत्रकार कल्पना शर्मा ने कुछ सालों पहले धारावी की समस्याओं के बारे में लिखना शुरु किया था. योजना के समय को लेकर उनको भी शक होता है.

उनका कहना है कि धारावी मुंबई की सबसे ख़राब झुग्गी बस्ती नहीं है.

वे कहती हैं कि मुंबई के लगभग 40 प्रतिशत लोग अस्थाई घरों में रहते हैं.

कल्पना शर्मा कहती हैं, ''यदि आप मुंबई की झुग्गी बस्तियों को ठीक करना चाहते हैं तो आपको प्राथमिकता तय करनी होगी. और यदि आप मुझे प्राथमिकता तय करने के लिए कहें तो धारावी का नंबर बहुत बाद में आएगा.''

लेकिन सरकार इस बात का विरोध करती है.

सरकार कहती है कि धारावी पर ध्यान देने के लिए राजनीतिक दलों में सहमति बनी हुई है.

ये पता नहीं कि धारावी एशिया की झुग्गी बस्ती बनी रहेगी या फिर सबसे अच्छा व्यावसायिक केंद्र बन जाएगी.

फिलहाल तो वह काम में लगी हुई है.