दिल्ली उच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह उन पूर्व और वर्तमान सांसदों की सूची प्रकाशित करे जो सरकार के देनदार हैं.
एक किसान संगठन की याचिका पर न्यायालय ने ये निर्देश दिया.
चुनाव आयोग से कहा गया है कि आम चुनाव से पहले इन लोगों के नाम विज्ञापन के ज़रिए कम से कम दो प्रमुख अख़बारों में छापे जाने चाहिए.
इन लोगों को फ़ोन, बिजली और पानी के बिल न भरने और कुछ अन्य ख़र्चों के कारण सरकार के करोड़ों रुपए चुकाने हैं.
जब न्यायालय में चुनाव आयोग ने विज्ञापन जारी करने पर ख़र्चे के बारे में आपत्ति जताई तो न्यायालय ने ये तर्क नहीं माना.
न्यायालय का कहना था कि कि यदि 'फ़ील गुड' के लिए करोड़ों रुपए का ख़र्चा हो सकता है तो मतदाताओं को जानकारी देने पर कुछ ख़र्चा क्यों नहीं हो सकता.
चुनाव आयोग से कहा गया है कि वह इन लोगों से हलफ़नामा ले कि इन्हें कितना पैसा चुकाना है.
समाचार एजेंसियों के अनुसार न्यायलय ने लोकसभा और राज्यसभा के महासचिवों को नोटिस जारी किया है पूछा है कि इन देनदारों का बकाया इनके वेतन और पेंशन में से क्यों नहीं काटा गया?