शुक्रवार, 27 फ़रवरी को गोधरा कांड की दूसरी बरसी थी.
एक ओर इसकी पूर्व संध्या पर गुजरात के बड़ोदा शहर में हिंसा की घटनाएँ हुईं हैं जिसमें तीन लोग मारे गए हैं.
दूसरी ओर पुलिस अभी भी यह गुत्थी नहीं सुलझा पाई है कि गोधरा कांड के पीछे क्या षडयंत्र था. वैसे इस मामले में पुलिस ने 80 लोगों को गिरफ़्तार किया है लेकिन 40 लोग अब भी फ़रार हैं.
हिंसा
बड़ोदा शहर में गुरूवार रात को हिंदू और मुस्लिम समुदायों के कुछ लोगों के बीच झड़पों में कम से कम तीन लोग मारे गए हैं और पाँच घायल हुए हैं.
पुलिस ने बताया है कि बड़ोदा के पानीगेट इलाक़े में झगड़ा उस समय शुरू हुआ जब मोहर्रम के ताज़ियों का जुलूस निकाल जा रहा था.
इस झगड़े में दोनों तरफ़ से पथराव हुआ.
पुलिस का कहना है कि स्थिति पर क़ाबू पाने के लिए उसमे कम से कम 15 आँसू गैस के गोले छोड़े और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए गोली भी चलाई.
पुलिस ने इस समय स्थिति को सामान्य और नियंत्रण में बताया है और कर्फ़्यू नहीं लगाया गया है.
दूसरी बरसी
ग़ौरतलब है कि 27 फ़रवरी, 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के एक डब्बे में एक भीड़ ने आग लगा दी थी.
![]() गोधरा कांड के बाद ही गुजरात में दंगे भड़क उठे थे |
इस भीड़ में अधिकतर लोग मुसलमान थे और इस हादसे ने 59 लोगों की जान ले ली थी.
मारे गए ज़्यादातर लोग अयोध्या से लौट रहे हिंदू थे.
इस घटना को दो बरस हो गए. हालांकि पुलिस ने 80 लोगों को गिरफ़्तार किया है लेकिन अभियुक्तों की सूची में शामिल 40 लोग अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं.
इतना ही नहीं अभी तक की जाँच में यह भी पता नहीं चला है कि गोधरा में हुई घटना के पीछे क्या मक़सद था और इसके पीछे मूल रुप से कौन था.
इस घटना के बाद गुजरात में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे शुरू हो गए थे जिनमें 2000 से ज़्यादा लोग मारे गए थे और उनमें ज़्यादातर मुसलमान थे.
दंगों के मामलों की भी जाँच अभी चल रही है और कई महत्वपूर्ण मामलों में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं.
बड़े आयोजन नहीं
अहमदाबाद में बीबीसी संवाददाता राजीव खन्ना का कहना है कि गोधरा कांड की दूसरी बरसी आमतौर पर खामोशी से ही मनाई जा रही है.
पिछले साल कई हिंदू संगठनों ने पहली बरसी ज़ोर शोर से मनाई थी और हिंदू नेताओं ने तीखे भाषण दिए थे.
विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार की सुबह गोधरा में दूसरी बरसी पर एक छोटा आयोजन किया.