ब्रिटेन की एक संस्था ने आरोप लगाया है कि गुजरात में दान के रुप में जमा की गई राशि आरएसएस से जुड़ी संस्थाओं को दे दी गई और ब्रिटेन में दानदाताओं को इसके बारे में नहीं बताया गया.
लेकिन आरएसएस और ब्रिटेन में इस दान राशि को इकट्ठा करने में सहायता करने वाली संस्था हिंदू स्वयंसेवक संघ(एचएसएस) ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए इसका खंडन किया है.
'आवाज़ साउथ एशिया वॉच' नाम की इस संस्था का कहना है कि ब्रिटेन में एक बड़ी राशि भूकंप पीड़ितों की सहायता के लिए सेवा इंटरनेशनल ने जमा की थी.
संस्था की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यह राशि भारत में सेवा भारती नाम की संस्था को दे दी गई जो आरएसएस से जुड़ी संस्था है.
आवाज़ की आपत्ति यह है कि आरएसएस से जुड़े संगठनों पर ही आरोप है कि वे गुजरात में दंगों के दौरान हिंसा की घटनाओं में शामिल थे.
'आवाज़' की जी प्रिया ने बीबीसी हिंदी से एक बातचीत में कहा कि उनके पास अपने आरोपों के पूरे सबूत हैं जो उन्होंने पिछले एक साल में जमा किए हैं.
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ''हम ये नहीं कह रहे हैं कि दान राशि का दंगों के लिए इस्तेमाल हुआ लेकिन जिन संस्थाओं को यह राशि दी गई वे दंगों में शामिल थीं.''
'आरोप बेबुनियाद'
'आवाज़' के इन आरोपों के बारे में ब्रिटेन की संस्खा एचएसएस का कहना है कि दान पंजीकृत संस्थाओं द्वारा लिया गया और उसका पूरा ऑडिट होता है कि पैसों का सही इस्तेमाल हुआ या नहीं.
संस्था के सहसचिव धीरज शाह ने बीबीसी से कहा कि दान की राशि से 6-7 गाँवों का पुनर्निर्माण किया गया, कई स्कूल बनाए गए और मोबाइल अस्पताल बनाए गए.
उनका कहना है कि ब्रिटेन के चैरिटी कमीशन के पास भी ब्रिटेन से आई दानराशि का पूरा हिसाब है.
दूसरी ओर आरएसएस के प्रवक्ता राम माधव ने दिल्ली में बीबीसी से कहा कि आवाज़ लोगों को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है.
उनका कहना है कि ब्रिटेन से पचास लोगों की एक टीम गुजरात आकर संस्था का काम देखकर जा चुकी है और वे लोग संतुष्ट थे.
राम माधव ने कहा कि यह कहना ग़लत होगा कि संस्था ने सिर्फ़ हिंदुओं के लिए काम किया क्योंकि जिन गाँवों का निर्माण हुआ वहाँ मुसलमानों के लिए भी मकान बनवाए गए हैं.
आवाज़ को चुनौती हुए उन्होंने कहा कि दंगों में आरएसएस या उससे जुड़े किसी संगठन का हाथ नहीं है.