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मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने की कोशिश

भारतीय जनता पार्टी ने अब मुस्लिम मतदाताओं को भी लुभाने की कोशिश की है.

भारतीय जनता पार्टी ने आम चुनावों से पहले दिल्ली में मुसलमानों का एक सम्मेलन बुलाया जिसे अल्पसंख्यक विकास सम्मेलन का नाम दिया गया.

प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने मुसलमानों से अपील करते हुए कहा कि वे भारतीय जनता पार्टी पर अपना अविश्वास एक तरफ़ रखकर पार्टी को ही वोट देने पर गंभीरता से विचार करें.

"हमने हमेशा समाज के सभी तबकों से मत माँगे हैं लेकिन मिले नहीं. मैं आपसे अपील करता हूँ कि अपना डर निकाल दें और गंभीरता से इस बारे में सोचें."

वाजपेयी का यह बयान भाजपा की एक कोशिश है देश के क़रीब 14 करोड़ मुसलमानों तक पहुँचने का.

मुस्लिम समुदाय भाजपा की हिंदूवादी नीतियों को हमेशा ही शक की नज़र से देखता है.

वोट पर नज़र

भाजपा पहले ही ऐलान कर चुकी है कि अयोध्या का मुद्दा उसके चुनावी एजेंडे में शामिल नहीं है.

लेकिन बहुत से मुसलमानों को भाजपा पर भरोसा करना मुश्किल नज़र आता है.

जमात उलेमा-ए-हिंद के एक नेता महमूद मदनी कहते हैं कि भाजपा के प्रति मुसलमानों की सोच बदलने का कोई आधार नज़र नहीं आता.

"भाजपा को इस वक़्त अचानक मुसलमानों तक पहुँचने सुध कैसे आई? उन्होंने पहले इस बारे में क्यों नहीं सोचा, जबकि वे पाँच साल सत्ता में रहे हैं."

महमूद मदनी का कहना था कि दो साल पहले गुजरात में हुई हिंसा ने मुस्लिम समुदाय को हिलाकर रख दिया है.

इस सम्मेलन में भाग लेने सऊदी अरब से आए एक इंजीनियर सरोश का कहना था, "वे हमारा भरोसा तभी जीत सकते हैं जब गुजरात दंगों के ज़िम्मेदार लोगों को सज़ा दिलाएं."

पाकिस्तान

प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने बुधवार को दिल्ली में कहा कि भारत और पाकिस्तान को मिलकर साथ-साथ चलना और रहना चाहिए.

उनका कहना है कि यदि दोनों देशों को लड़ना ही है तो ग़रीबी और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ लड़ना चाहिए, एक दूसरे के साथ नहीं.

वाजपेयी ने कहा, "भारत और पाकिस्तान के बीच कोई झगड़ा नहीं है."