श्रीलंका में होने वाले आम चुनाव के लिए प्रमुख पार्टियाँ गुरूवार को अपने चुनाव अभियान की शुरूआत करने वाली हैं.
श्रीलंका में नई संसद के लिए दो अप्रैल को मतदान होना है और नामांकन पत्र दाखिल करने से पहले ही वहाँ हिंसा की घटनाएँ शुरू हो गई हैं.
मंगलवार को नामांकन पत्र दाख़िल करने के अंतिम दिन हिंसा की कई घटनाओं में कम से कम 40 लोग घायल हो गए.
संसद की 225 सीटों के लिए 6,024 उम्मीदवारों ने अपने पर्चे भरे हैं.
कुल मिला कर 24 मान्यता प्राप्त पार्टियाँ और 192 स्वतंत्र उम्मीदवारों ने चुनाव के लिए अपने नामांकन पत्र दाख़िल किए हैं.
इस बार चुनाव में भाग लेने वाले उम्मीदवारों की संख्या पहली बार 1948 में श्रीलंका के ब्रिटेन से आज़ादी हासिल करने के बाद वहाँ हुए चुनाव में उतरे उम्मीदवारों की संख्या से ज़्यादा रही है.
हिंसा
तमिल टाइगर विद्रोहियों ने ये चेतावनी दी है कि अगर उनके समर्थकों को मतदान करने से रोका गया तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं.
पुलिस का कहना है कि मंगलवार को देश के दक्षिणी और मध्य-उत्तरी क्षेत्रों में हिंसा की 27 घटनाएं हुई हैं जिनमें पार्टी के 40 कार्यकर्ता घायल हो गए.
घायल होनेवाले अधिकतर लोग विभिन्न पार्टियों के कार्यकर्ता हैं.
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार अब तक चुनाव क़ानून के उल्लंघन की 82 घटनाएं घटी हैं.
इन घटनाओं में विरोधी दलों के पोस्टर हटाने से ले कर डराने-धमकाने और अन्य हिंसक वारदात शामिल हैं.
भय
कोलंबो से बीबीसी संवाददाता फ़्रांसिस हैरिसन का कहना है कि चुनाव के पहले इस तरह भड़की हिंसा से चुनाव पर नज़र रखनेवाले लोगों के मन में डर समा गया है.
पर्यवेक्षकों के ऐसे ही एक दल सेंटर फ़ॉर मोनिटरिंग एलेक्शन वायलेंस ने एक वक्तव्य जारी कर इस तरह फैल रही हिंसक घटनाओं के प्रति चिंता व्यक्त की है.
संस्था ने इस तथ्य पर भी रोशनी डाली है कि इस तरह की सभी घटनाओं में दो राजनीतिक पार्टियाँ पीपुल्स अलायंस और युनाइटेड नेशनल पार्टी शामिल हैं.
वक्तव्य में ये भी कहा गया है कि पहले हुए चुनावों में यही दो पार्टियाँ हिंसा की तीन चौथाई घटनाओं के लिए ज़िम्मेवार रही हैं.
राष्ट्रपति कुमारतुंगा ने जो पीपुल्स अलायंस की प्रमुख हैं जबकि प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे की पार्टी का नाम युनाइटेड नेशनल पार्टी है.