चुनाव आयोग ने देश के सभी राजनीतिक दलों से चर्चा के बाद कहा है कि लोकसभा के चुनाव चार चरणों में करवाए जाएँगे.
चुनाव की तारीख़ों की घोषणा अभी नहीं की गई है.
देश के सभी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों की एक बैठक शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त टीएस कृष्णमूर्ति ने बुलाई थी.
इस बैठक के बाद चुनाव आयोग ने कहा कि वह तारीख़ों के बारे में फ़ैसला लेते हुए मौसम, परीक्षाओं, फ़सल कटाई और ख़रीदी और त्यौहारों का ध्यान रखेगा.
आयोग ने अपनी तैयारियों का ब्यौरा देते हुए कहा कि आवश्यकता होने पर कुछ राज्यों की मतदाता सूची में संशोधन किया जा सकता है.
आयोग ने कहा है कि जिन राज्यों में विधानसभा भंग की जा चुकी है उन राज्यों में विधानसभा के चुनाव भी लोकसभा के साथ करवा लिए जाएँगे.
चुनाव आयोग ने कहा है कि इस बार मतदान केंद्रों पर महिलाओं के लिए अलग क़तार की व्यवस्था रहेगी.
राजनीतिक दलों की माँग
चार घंटे चली इस बैठक में कुछ विपक्षी दलों ने सत्ताधारी दल की ओर से 'भारत उदय' के विज्ञापनों पर आपत्ति जताई और आचार संहिता का सवाल उठाया.
लेकिन इस आपत्ति पर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का ज़िक्र करते हुए कहा कि आचार संहिता चुनाव की तारीख़ें जारी होने के बाद ही लागू हो सकती हैं.
राजनीतिक दलों के बीच आमतौर पर इस बात को लेकर सहमति थी कि उत्तर प्रदेश के अलावा शेष सभी राज्यों में चुनाव एक ही दिन करवा लिया जाए.
उनका कहना था कि उत्तर प्रदेश बड़ा राज्य है इसलिए वहाँ दो चरणों में चुनाव हो सकते हैं.
लेकिन तेलगू देशम पार्टी का कहना था कि उनके राज्य आँध्र प्रदेश में भी दो चरणों में चुनाव होना चाहिए क्योंकि तेलंगाना क्षेत्र में क़ानून व्यवस्था की बहुत दिक़्क़तें हैं.
सभी दलों में इस बात को लेकर भी सहमति थी कि चुनाव में बिना पहचान पत्र के भी मतदान की अनुमति दी जाए.