दिल्ली में फूलन देवी हत्याकांड में प्रमुख अभियुक्त शेर सिंह राणा के मंगलवार को तिहाड़ जेल से नाटकीय ढंग से फ़रार होने की घटना के सिलसिले में कुछ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है.
पुलिस अभी इस मामले में कुछ अधिकारियों से पूछताछ भी कर रही है.
जेल अधिकारियों का कहना है कि अभी तक तिहाड़ जेल के पाँच अधिकारियों से गहन पूछताछ की गई है.
तिहाड़ जेल के महानिदेशक अजय अग्रवाल ने बताया है कि जेल की तीन शक के आधार पर निलंबित कर दिया गया है.
उन पर शक किया जा रहा है कि उन्होंने शेर सिंह राणा को जेल से भगाने में मदद की.
निलंबित अधिकारियों में एक उप अधीक्षक वीडी पुष्करणा, एक सहायक अधीक्षक प्रेम चंद यादव और हैड वार्डन रमेश चंद शामिल हैं.
दिल्ली के पुलिस आयुक्त की प्रारंभिक जाँच रिपोर्ट में जेल के कुछ अधिकारियों को ही राणा के फ़रार होने का ज़िम्मेदार बताया गया है.
पुलिस आयुक्त केके पॉल ने बताया, "तिहाड़ जेल से राणा के फ़रार होने का शुरुआती जाँच में जेल के स्टाफ़ की मिली भगत साबित होती है.
मजिस्ट्रेट जाँच
घटना की मजिस्ट्रेट जाँच के आदेश मंगलवार को ही दिए गए थे.
पुलिस ने राणा के बारे में जानकारी देने वाले को पचास हज़ार रुपए के ईनाम की भी घोषणा की है.
दिल्ली के पुलिस महानिदेशक (जेल प्रशासन) अजय अग्रवाल ने मंगलवार को बीबीसी से कहा था कि मजिस्ट्रेट जाँच में ही यह पता चल पाएगा कि ग़लती कहाँ हुई.
समाजवादी पार्टी की सांसद फूलन देवी की जुलाई 2001 में दिल्ली में उनके निवास के बाहर हत्या कर दी गई थी.
इस मामले में शेर सिंह राणा सहित पाँच लोगों पर मुक़दमा चल रहा है.
अजय अग्रवाल ने बताया कि शेर सिंह राणा को मंगलवार को हरिद्वार की एक विशेष अदालत में पेश किया जाना था.