श्रीलंका की राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा ने 39 मंत्रियों को बर्ख़ास्त कर दिया है.
इनमें कोई भी कैबिनेट स्तर का मंत्री नहीं है और सब ऐसे मंत्री है जिनकी नियुक्ति प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे ने की थी.
राष्ट्रपति की ओर से इन सभी मंत्रियों को भेजी गई चिट्ठी में कहा गया है कि ऐसे प्रमाण मिले हैं कि इन लोगों ने ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से मंत्रालयों से गाड़ियाँ, काग़ज़ात और सामान हासिल किए.
दूसरी तरफ़ विक्रमसिंघे सरकार के प्रवक्ता जी एल पीरिस ने इस फ़ैसले की निंदा करते हुए इसे एक अभूतपूर्व क़दम बताया है.
बीबीसी की श्रीलंका संवाददाता फ्रांसिस हैरिसन का कहता है कि ऐसा लगता है कि राष्ट्रपति ने इस चिंता के बाद ये क़दम उठाया है कि कहीं सरकारी मशीनरी का चुनाव में इस्तेमाल न किया जाने लगे.
स्वाभाविक क़दम
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि मंत्रियों को हटाने के राष्ट्रपति के फ़ैसले को अस्वाभाविक नहीं माना जा रहा है.
संविधान के आधार पर इन मंत्रियों का कार्यकाल शनिवार को तब ख़ुद समाप्त हो गया जब राष्ट्रपति ने संसद भंग कर दी.
वैसे ये मंत्री कार्यकारी सरकार के सदस्य के तौर पर अपने पद पर बने हुए थे.
अब मंत्रियों को हटाए जाने के बाद राष्ट्रपति के प्रवक्ता जे पीरिस ने कहा, "हमसे ये कहा गया है कि हम उनकी गाड़ियाँ वापस ले लें क्योंकि ये बिल्कुल अनुचित होगा कि वे इनका चुनावों में इस्तेमाल करें."
मगर सरकार के प्रवक्ता जी एल पीरिस ने राष्ट्रपति के रवैए की यह कहते हुए आलोचना की है कि पिछले दो चुनावों में इस तरह से मंत्रियों को बर्ख़ास्त नहीं किया गया था.
श्रीलंका में दो अप्रेल को आम चुनाव होने हैं.