पश्चिमी देशों के रहने वाले अब तक भारत आते थे योग और आयुर्वेद का लाभ उठाने.
मगर अब भारत में ऐसे लोगों को भी लुभाने की कोशिश चल रही है जो इलाज के लिए भारत आना चाहते हों.
महाराष्ट्र की चिकित्सा पर्यटन परिषद को पूरी उम्मीद है कि जल्दी ही भारत चिकित्सा के लिए आने वाले पर्यटकों की पहली पसंद बन जाएगा.
परिषद का कहना है कि मुंबई में हिंदुजा जैसे अस्पतालों में विश्व स्तरीय चिकित्सा होती है मगर यूरोप और अमरीका जैसे देशों की तुलना में यहाँ ख़र्च बहुत कम होता है.
तुलना
मुंबई के हिंदुजा जैसे अस्पताल को देखा जाए तो उसकी चमक-दमक और साज़ो-सामान लंदन और न्यूयॉर्क की याद दिलाते हैं.
मगर चिकित्सा पर्यटन परिषद ने जो तुलनात्मक सूची तैयार की है उस पर निगाह डालें तो ख़र्च का अंतर साफ नज़र आता है.
परिषद की सूची के अनुसार दिल की बीमारी के लिए होने वाले ऑपरेशन में जहाँ पश्चिमी देशों में 50,000 डॉलर देने होते हैं वहीं मुंबई में ये इलाज बस 10,000 डॉलर में हो जाता है.
चिकित्सा परिषद अब एक ऐसे टूर पैकेज निकालना चाहते हैं जिनमें आने-जाने और ठहरने से लेकर इलाज तक का ख़र्च एक ही साथ शामिल है.
योजना
शुरू में परिषद ऐसे विदेशी मरीज़ों को भारत बुलाना चाह रही है जिन्हें अपने देशों में इलाज के लिए निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है.
मगर ब्रिटेन जैसे देशों पर भी उनकी नज़र है जहाँ सरकारी अस्पतालों में ऑपरेशन के लिए मरीज़ों को लंबा इंतज़ार करना पड़ता है.
हिंदुजा अस्पताल के मुख्य न्यूरोसर्जन संजय अग्रवाल कहते हैं,"जहाँ भी आप कम कीमत पर बेहतर सुविधाएँ देंगे, अंत में जीत उसी की होगी".
मगर इस सारी योजना से भारत की चिकित्सा व्यवस्था को कितना फ़ायदा होगा अभी ये अनिश्चित है.
ये हो सकता है कि इससे डॉक्टरों और अस्पतालों के साथ-साथ विदेशों से आने वाले मरीज़ों को भी फ़ायदा हो मगर इस लाभ का भारत की चिकित्सा व्यवस्था पर कितना असर पड़ेगा इसमें संदेह है.