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मध्य प्रदेश सरकार और साहित्यकार

मध्यप्रदेश में उमा भारती सरकार साहित्यकारों के साथ एक विवाद में घिर गई है.

ये विवाद एक अस्पताल के नाम को लेकर है जिसका नाम प्रसिद्ध कवि डॉक्टर शिवमंगल सिंह 'सुमन' के नाम पर था.

उज्जैन में स्थित इस अस्पताल का नाम नई सरकार ने बदलकर भारतीय जनता पार्टी के पूर्व अध्यक्ष कुशाभाऊ ठाकरे के नाम पर रखने का फ़ैसला किया है.

राज्य के विपक्षी दल काँग्रेस ने इसपर आपत्ति जताई है.

उज्जैन के साहित्यकारों ने इस क़दम को ओछी मानसिकता बताया है.

इस विवाद के कारण उमा भारती ने अपना उज्जैन का दौरा रद्द करना पड़ा.

दूसरा विवाद

इससे पहले भोपाल के वामपंथी साहित्याकारों से भी उमा भारती का विवाद हुआ था.

ये विवाद दो पुस्तकों को लेकर छिड़ा था जिसमें भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की आलोचना की गई थी.

ये पुस्तकें मध्य प्रदेश की साहित्य परिषद की ओर से रवींद्र भवन में लोकरंग मेले में बिक रही थीं.

इसके बाद राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश साहित्य परिषद के सचिव पूर्णचंद्र रथ और भोपाल स्थित सांस्कृतिक केंद्र भारत भवन के उपनिदेशक मदन सोनी को निलंबित कर दिया था.

इस घटना के बाद भोपाल में वामपंथी साहित्यकारों और लेखकों ने बयान जारी कर सरकार के फ़ैसले का विरोध किया.

हिंदू मतदाता

उमा भारती ने सत्ता में आने के बाद एक तरफ़ तो सड़कों और बिजली की स्थिति सुधारने के लिए युद्ध स्तर पर काम शुरू किया है वहीं हिंदू मतदाताओं को रिझाने के लिए भी कई फ़ैसले किए हैं.

उनकी सरकार ने मध्य प्रदेश के दो शहरों अमरकंटक और महेश्वर को पवित्र शहर का दर्जा देने की घोषणा की.

इस ऐलान के बाद इन शहरों में माँस-मछली और अंडे-शराब की बिक्री पर रोक लगा दी गई है.

मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में गो वंश की हत्या पर भी प्रतिबंध लगाने का फ़ैसला किया है.