अमरीका ने पाकिस्तान से कहा है कि वह उस तंत्र का पूरी तरह से सफ़ाया करे जिसके तहत ईरान, लीबिया और उत्तर कोरिया को गुप्त रूप से परमाणु तकनीक लीक की गई.
अमरीकी विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल ने राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ से फ़ोन पर इस बारे में बात की है.
उनका कहना था कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने उन्हें भरोसा दिलाया कि डॉक्टर अब्दुल क़दीर ख़ान को दी गई माफ़ी सशर्त है.
उधर उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उसे पाकिस्तान के कोई परमाणु तकनीक नहीं दी गई.
उत्तर कोरिया ने आरोप लगाया है कि ये 'अमरीका का झूठा प्रचार है.'
अमरीका की माँग
इससे पहले पाकिस्तान कह चुका है कि पाकिस्तान में इस बारे में की जा रही जाँच से मिली जानकारी अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी को भी उपलब्ध करवाई जाएगी.
ये भी कहा गया है कि डॉक्टर क़दीर ख़ान को दी गई माफ़ी उनके इस जाँच को सहयोग देने के साथ जुड़ी हुई है.
कॉलिन पॉवेल ने कहा कि अमरीका गुप्त जानकारी देने वाले तंत्र और इसमें क़दीर ख़ान की भूमिका के बारे में सब कुछ जानना चाहता है.
उन्होंने कहा कि फ़िलहाल उनके पाकिस्तान जाने की कोई याजनी नहीं है लेकिन वे इस साल अगले कुछ महीनों में वहाँ जाएँगे.
बीबीसी के दक्षिण एशिया मामलों के विशेषज्ञ मानते हैं कि इस पूरे मामले ने राष्ट्रपति मुशर्रफ़ को मुश्किल में डाल दिया है.
ये इसलिए क्योंकि डॉक्टर अब्दुल क़दीर ख़ान को पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के जनक के रूप में देखा जाता है.
पाकिस्तान में इस पूरे मामले पर कई जगह सरकार विरोधी प्रदर्शन भी हो चुके हैं.
पाकिस्तान के स्थानीय समाचार माध्यमों में लगातार इस विषय पर चर्चा हो रही है कि परमाणु तकनीक देश के राजनीतिक और सैनिक नेतृत्व की जानकारी के बिना कैसे लीक हो गई?