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रविवार, 08 फ़रवरी, 2004 को 23:33 GMT तक के समाचार

'चुनौती साम्प्रदायिक ताकतों से निपटना'

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता और पोलिट ब्यूरो के सदस्य सीताराम येचुरी का कहना है कि इस समय देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती साम्प्रदायिक ताकतों से निपटना है.

'आपकी बात बीबीसी के साथ' कार्यक्रम में उनसे बातचीत का विषय था कि अपने जनाधार वाले राज्यों में कांग्रेस के ख़िलाफ़ राजनीति करने वाली कम्युनिस्ट पार्टियाँ राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस का साथ कैसे देंगी.


उनका कहना है कि माकपा ने चुनाव में कांग्रेस को समर्थन का फ़ैसला तो पार्टी ने किया है लेकिन चुनाव के बाद किसे समर्थन दिया जाएगा इसका फ़ैसला अभी नहीं किया गया है.

श्रोताओं के सवालों के जवाब देते हुए सीताराम येचुरी ने कहा कि कम्युनिस्ट पार्टियों को लगता है कि इस समय बड़ी चुनौती देश को साम्प्रदायिकता से बचाना है इसलिए इस समय चुनाव में धर्मनिरपेक्ष ताक़तों का साथ देना ज़रुरी था.

उन्होंने इस बात का खंडन किया कि कम्युनिस्ट पार्टियाँ औद्योगिकीकरण की विरोधी है या उन्होंने कर्मचारियों को भड़काया.

उनका कहना था कि चीन में विकास कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में ही हो रहा है.

'एनडीए कमज़ोर हुआ'

सीताराम येचुरी का कहना था कि एनडीए के साथी उसे छोड़ रहे हैं और उनके गठबंधन की पार्टियों का जनाधार कमज़ोर हुआ है.

उन्होंने कहा कि 'फ़ील गुड फ़ैक्टर' की असलियत जनता जानती है.

एक सवाल के जवाब में उन्होंने दावा किया कि चुनाव के बाद एनडीए का एक विकल्प उभरकर आएगा और वे एक सरकार बनाने में सफल होंगे.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस का चुनाव में समर्थन का मतलब यह नहीं है कि कम्युनिस्ट पार्टी उसकी नीतियों का भी समर्थन कर रही है या कोई साझा मंच बनाया जा रहा है.

मंदिर का मुद्दा फिर से उछालने के सवाल पर उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा इस मुद्दे पर वोट बटोरने की कोशिश करती रही है.

सोनिया गाँधी के विदेशी मूल के मामले में उनका मानना है कि इसका फ़ैसला जनता करेगी.

कार्यक्रम का संचालन किया नागेंदर शर्मा ने.