तमिलनाडु में एक विशेष पोटा अदालत ने एमडीएमके नेता वाइको को ज़मानत पर छोड़ने का आदेश दिया है.
वाइको विवादित क़ानून पोटा के तहत क़रीब डेढ़ साल से जेल में बंद हैं.
वाइको पर आरोप है कि उन्होंने प्रतिबंधित संगठन एलटीटीई के समर्थन में भाषण दिए थे.
ज़मानत पर छोड़ने के अदालत के आदेश के बावजूद वाइको ज़मानत स्वीकार करने के बारे में अपने वकीलों से विचार-विमर्श कर रहे हैं. क्योंकि ज़मानत के साथ कड़ी शर्त लगाई गई है.
विशेष पोटा अदालत ने वाइको को मुक़दमा ख़त्म होने तक चेन्नई न छोड़ने का आदेश दिया है.
अदालत ने उन्हें मीडिया से बात करने पर रोक लगाई है और कहा है कि वे राजनीतिक कारणों का हवाला देते हुए अदालत की सुनावाई के दौरान पेश होने से नहीं बच सकते.
वाइको के साथ ही उनकी पार्टी के आठ अन्य सदस्य भी गिरफ़्तार हुए थे जिन्हें पहले ही जमानत पर छोड़ा जा चुका है.
जानकारों का कहना है कि वाइको की ज़मानत के साथ जोड़ी गई कड़ी शर्तें उनके चुनावी अभियान पर असर डालेंगी.
उनकी पार्टी लोकसभा चुनाव में चार सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रही है.
वाइको ज़मानत के लिए अपील से इनकार करते रहे हैं लेकिन चुनाव प्रचार के मद्देनज़र उन्होंने अपील करने का फ़ैसला किया.
अब वाइको अपने वकीलों से यह सलाह-मशविरा कर रहे हैं कि क्या उन्हें ज़मानत स्वीकार करनी चाहिए या फिर मुक़दमा ख़त्म होने का इंतज़ार करना चाहिए जो आख़िरी दौर में है.
वाइको की पार्टी एमडीएमके पहले केंद्र की सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल थी लेकिन बाद में इससे अलग हो गई.
उनकी पार्टी के साथ डीएमके और पीएमके भी गठबंधन से अलग हो चुकी हैं और काँग्रेस के साथ उनका गठबंधन भी हो चुका है.