उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने उन ख़बरों को सरासर ग़लत और निराधार बताया है कि उनकी बहुजन समाज पार्टी का कांग्रेस के साथ गठबंधन हो गया है.
उनका कहना था कि आगामी लोकसभा चुनाव में धर्मनिरपेक्ष ताकतों को मज़बूत करने और साम्प्रदायिकता को कमज़ोर बनाने के लिए किसी गठबंधन में शामिल होना जरुरी नहीं है.
उन्होंने कहा, "मैं उन मीडिया रिपोर्टों की आलोचना करती हूँ जिनके अनुसार बसपा कांग्रेस के साथ गठबंधन की कोशिशें कर रही है."
मायावती ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी से मुलाक़ात को सामान्य और औपचारिक मुलाक़ात बताया.
मगर इसके बाद भारत के अख़बारों में अटकलें लगाती हुई ख़बरें छपी थीं कि दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन हो रहा है.
मायावती ने दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "ये सही नहीं है."
उनका कहना था कि अगर बसपा अकेले दम पर भी लोकसभा चुनाव लड़ती है तो भी वह धर्मनिरपेक्ष ताक़तों को मज़बूत कर सकती है.
ये पूछे जाने पर कि कांग्रेस के साथ गठबंधन के लिए क्या उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से कांग्रेस के समर्थन वापसी की शर्त रखी है तो उन्होंने कहा, "जब समझौते पर चर्चा ही नहीं हुई तो शर्त रखने की बात कहां उठती है."
उन्होंने इस बात पर अफ़सोस ज़ाहिर किया कि इन सब समाचारों में एकतरफ़ा बात की गई और उनका मत नहीं लिया गया.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के गुन्नौर विधानसभा सीट से भारी मतों से जीतने के बारे में उन्होंने कहा कि जिन मतदान केंद्रों पर दोबारा मतदान का आदेश दिया गया था उनका बसपा ने बहिष्कार कर दिया था.
मायावती का कहना था कि भाजपा पिछले दिनों चार राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में से तीन में मिली जीत को भुनाना चाहती है.