http://www.bbcchindi.com

कल्पना को ऐसे याद किया उनके पिता ने

कल्पना चावला की पहली पुण्यतिथि को भोपाल के बरकतुल्ला विश्वविद्यालय ने 'उड़ान' के नाम से मनाया.

इस आयोजन के प्रमुख अतिथि थे कल्पना चावला के पिता केएल चावला.

उन्होंने इस कार्यक्रम में कल्पना के बचपन और पढ़ने में उसकी रुचि को लेकर कई ऐसी बातें बताईं जो दिल को छू लेने वाली थीं.

विश्वविद्यालय का ज्ञान विज्ञान सभागार भोपाल के कालेज विद्यार्थियों से खचाखच भरा था.

कल्पना चावला के पिता ने अपनी दिवंगत बेटी के दिल छूने वाले संस्मरण सुनाए.

उन्होंने कहा कि कल्पना ने जीवनभर अपने कपड़ों पर प्रेस नहीं की.

उसने कभी मेकअप का सामान नहीं खरीदा. यानी चूड़ी, बिंदी आदि श्रृंगार का सामान न पिता से खरीदवाया न खुद कभी ख़रीदा.

वह अपनी किताबों मे डूबी रहती थी.

कल्पना चावला के पिता ने कहा कि जब कल्पना चंडीगढ़ मे ग्रेजुएशन कर रही थी तभी उसके एडमीशन का पत्र एलींगटन विश्वविद्यालय, अमरीका से आ गया.

उसी समय पिता को एक महीने के दौरे पर बाहर जाना पड़ा.

कल्पना के पिता को दो महीने लग गए.

इस बीच कल्पना चंडीगढ के उसी स्कूल में पढ़ाने का काम करने लगी जहाँ वह पढ़ा करती थी.

कल्पना के पिता दौरे से अपने गाँव लौटे और दूसरे दिन ही कल्पना से चंडीगढ़ में मिले.

कल्पना रो पड़ी.

पिता ने तत्काल दिल्ली और एलींगटन सम्पर्क किया.

आख़िरकार कल्पना का प्रवेश अमरीकी विश्वविद्यालय में हो गया.

गर्व

कल्पना चावला के पिता ने वह किस्सा भी सुनाया जब वे बेटी के साथ विदेश में थे और उन पर ग़लत पार्किंग के लिए 50 डॉलर का जुर्माना लग गया.

घरेलू उड़ान में एयर होस्टेस ने कल्पना के पिता से कल्पना का नाम जानना चाहा लेकिन उन्होंने नहीं बताया.

एयर होस्टेस कहती रही कि ये कल्पना चावला है तो उनका जुर्माना समाप्त किया जा सकता है लेकिन कल्पना नहीं मानीं.

पत्रकारों से बातचीत मे केएल चावला ने कहा, ''लोग तो बेटों के नाम से जाने जाते हैं पर मुझे गर्व है कि मैं बेटी के नाम से जाना जाता हूँ.''

उनका कहना था कि भारत में कल्पना चावला जैसी बहुत सी लड़कियाँ हैं. उन्हें पहचानने, उनकी पढ़ाई लिखाई की व्यवस्था की जाए तो भारत में कई कल्पना चावला खड़ी हो सकती हैं.