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भारत में जल्दी आम चुनाव होना तय

भारत में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लोकसभा को छह फरवरी को भंग करने का प्रस्ताव किया है.

इसके साथ ही निर्धारित समय से पहले देश में आम चुनाव कराने का रास्ता साफ हो गया है.

मंगलवार शाम प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने एक पंक्ति के प्रस्ताव के ज़रिए यह फ़ैसला किया.

बाद में वाजपेयी ने राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से मिल कर उन्हें इस बारे में सूचित किया और लोकसभा भंग करने की सिफ़ारिश की.

भारतीय संविधान के प्रावधानों के अनुसार राष्ट्रपति केंद्रीय मंत्रिमंडल की इस सलाह को मानने को मजबूर हैं.

नई लोकसभा का गठन छह महीने के भीतर कर लिया जाना अनिवार्य है.

अंतरिम बजट

लोकसभा को भंग किए जाने से पहले इसका पाँच दिनों का एक संक्षिप्त अधिवेशन आयोजित किया जा रहा है.

इस बैठक में अंतरिम बजट और अप्रैल महीने में सरकार के ख़र्चे के लिए लेखानुदान पारित किया जाएगा.

लोकसभा के इस संक्षिप्त सत्र में रेलवे के लिए भी लेखानुदान पास किए जाने की संभावना है.

वाजपेयी सरकार अप्रैल-मई में आम चुनाव कराना चाहती है.

विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्र में सत्तारूढ़ गठबंधन की पार्टियाँ देश की बेहतर आर्थिक स्थिति को अपनी प्रमुख उपलब्धि के रूप में चुनावों में भुनाना चाहती है.