सोमवार, 26 जनवरी, 2004 को 08:00 GMT तक के समाचार
चार जनवरी, रविवार को अफ़ग़ानिस्तान की सर्वोच्च पंचायत लोया जिरगा ने नए संविधान को मंज़ूरी दे दी.
इस संविधान के प्रमुख बिंदु
अफ़ग़ानिस्तान एक इस्लामिक गणतंत्र होगा और इस्लाम एक 'पवित्र धर्म' माना जाएगा.
दूसरे धर्म के अनुयायियों को क़ानून के भीतर अपना अपना धर्म मानने की छूट होगी.
कोई भी क़ानून इस्लाम की मान्यताओं के ख़िलाफ़ नहीं होगा.
क़ानून के सामने पुरुष और महिलाएँ को बराबरी के अधिकार होंगे.
अफ़ग़ानिस्तान में राष्ट्रपति शासन प्रणाली होगी.
राष्ट्रपति देश के प्रति और निचले सदन वोलेसी जिरगा के प्रति जवाबदेह होंगे.
संसद में दो सदन होंगे. निचला सदन वोलेसी जिरगा जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों का सदन होगा. मेशरानो जिरगा उच्च सदन होगा.
वोलेसी जिरगा को अधिकार होगा कि वह मंत्रियों पर महाभियोग लगाकर उन्हें बर्खास्त कर सके.
वोलेसी जिरगा की सहमति से ही राष्ट्रपति मंत्रियों, अटॉर्नी जनरल और सेंट्रल बैंक के गवर्नर की नियुक्ति करेंगे.
किसी दूसरे देश के नागरिक को मंत्री बनने का अधिकार नहीं होगा लेकिन दोहरी नागरिकता यानी दो देशों की नागरिकता वाले किसी व्यक्ति को मंत्री बनाने के मामले में वोलेसी जिरगा की सहमति अनिवार्य होगी.
पूर्व शासक ज़हीर शाह को 'राष्ट्रपिता' का दर्जा दिया जाएगा.
पश्तो और दरी राष्ट्रीय भाषा होगी. लेकिन प्रांतों की सरकारें अपने लिए राजकाज की वह भाषा चुन सकेंगे जो उनके क्षेत्रों में बोली जाती हैं.