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राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का विभाजन

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का औपचारिक विभाजन हो गया है. एक गुट ने शरद पवार को अध्यक्ष पद से हटाकर ये ज़िम्मेदारी पीए संगमा को दे दी है तो वहीं दूसरे गुट ने शरद पवार को ही अध्यक्ष बनाए रखने की बात कही है.

इस बीच छत्तीसगढ़ में पार्टी नेता विद्याचरण शुक्ल ने पार्टी से अलग होकर एक आंचलिक पार्टी बनाने की घोषणा की है.

ये पूरा विवाद और पार्टी में टूट की नौबत आम चुनाव की आहट के बीच गठबंधन के मसले पर हुई है. शरद पवार का गुट जहाँ कांग्रेस के साथ तालमेल करने के पक्ष में है तो वहीं संगमा गुट राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के साथ जाना चाहता है.

शरद पवार गुट के नेता तारिक़ अनवर ने संगमा की इस नियुक्ति को ग़ैर-सांवैधानिक बताया. उन्होंने कहा कि जिसके पास तीन चौथाई लोगों का बहुमत होगा वही असली पार्टी होगी और इतना समर्थन शरद पवार के गुट के पास ही है.

इसी वजह से संगमा ने बताया कि पार्टी कार्यकारिणी की उनके निवास पर बैठक हुई जिसमें उन्हें पवार की जगह अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया.

विदेशी मूल का मुद्दा

संगमा का कहना था कि पार्टी का गठन जिन सिद्धांतों को लेकर किया था उनमें प्रमुख ये था कि विदेशी मूल का व्यक्ति देश का प्रधानमंत्री नहीं हो सकता.

उन्होंने कहा कि शरद पवार को पार्टी से निष्कासित नहीं किया गया है और उन्हें कांग्रेस के साथ जाने के फ़ैसले के बारे में फिर से सोचना चाहिए.

संगमा का कहना था कि वह पवार का सम्मान करते हैं मगर सिद्धांतों पर समझौता नहीं कर सकते.

वहीं जब विदेशी मूल के व्यक्ति के प्रधानमंत्री पद के लिए समर्थन के बारे में अनवर से पूछा गया तो उनका कहना था कि कांग्रेस पार्टी ख़ुद ही कह चुकी है कि वह बतौर प्रधानमंत्री किसी का नाम पेश नहीं कर रही है.

अनवर ने कहा कि ऐसे में बहस का कोई मसला नहीं है और ये विवाद बार-बार नहीं उठाना चाहिए.

चुनाव निशान

अब इन सब स्थितियों के बाद मसला चुनाव आयोग के पास जा सकता है क्योंकि दोनों ही गुट अपने धड़े को असली पार्टी बता रहे हैं.

ऐसे में चुनाव को देखते हुए चुनाव निशान किसे दिया जाएगा ये फ़ैसला आयोग को करना होगा.