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हुर्रियत नेता वाजपेयी से मिले

भारत सरकार के साथ बातचीत के लिए दिल्ली आए हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नेताओं ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मुलाक़ात की.

हुर्रियत नेताओं ने इस मुलाक़ात को शिष्टाचार के नाते हुई मुलाक़ात बताया.

लगभग आधे घंटे की मुलाक़ात के बाद प्रधानमंत्री आवास से बाहर आकर मीरवाइज़ उमर फ़ारूख़ ने कहा कि ये एक अच्छी शुरूआत है.

उन्होंने कहा,"हमारी औपचारिक बातचीत तो गुरूवार को ही हो चुकी थी. हम तो बस उनसे मिलने आए थे".

कश्मीर के अलगाववादी संगठन हुर्रियत कॉंफ़्रेंस के पाँच नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरूवार को उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी से मुलाक़ात की थी.

मुलाक़ात

उपप्रधानमंत्री आडवाणी से मुलाक़ात के बाद दोनों पक्षों ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा था कि सभी तरह की हिंसा का अंत होना चाहिए और बातचीत जारी रहनी चाहिए.

पिछले 15 वर्षों में भारत सरकार के साथ शीर्ष स्तर पर हुर्रियत की यह पहली सीधी और औपचारिक बातचीत थी.

लगभग ढाई घंटे की बातचीत के बाद अब्बास अंसारी ने कहा कि मार्च में फिर दूसरे दौर की बातचीत होगी.

उन्होंने ये भी कहा कि हुर्रियत बातचीत का दायरा बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है.

बातचीत के बारे में उन्होंने कहा, "ये बहुत अच्छी शुरुआत है. हम सिर्फ़ ये नहीं चाहते कि कश्मीर और हिंदुस्तान के बीच बल्कि कश्मीर, हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच ऐसी बातचीत होनी चाहिए जो मुफ़ीद हो."

अंसारी ने उम्मीद जताई कि इसमें उन्हें कामयाबी मिलेगी.

उपप्रधानमंत्री आडवाणी के कट्टरपंथी होने के बारे में उन्होंने कहा, "मैं समझ रहा था शायद वाजपेयी ही उदारवादी हैं और उधर मुशर्रफ़ हैं मगर आडवाणी जी से बातचीत में हमें ये पता चला कि वे भी बहुत उदार हैं."

उन्होंने कहा कि आडवाणी की भी इच्छा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच दुश्मनी ख़त्म हो.