भारत में राजनीति को लेकर बड़ी उत्सुकताओं में से एक है कि क्या प्रियंका और राहुल गाँधी सक्रिय राजनीति में आएँगे.
हर चुनाव के पहले ये उत्सुकता और बढ़ जाती है.
ज़ाहिर है कि चुनाव के ठीक पहले राजीव और सोनिया गाँधी के बच्चे रायबरेली के रास्ते अमेठी पहुँचे तो अटकलें लगाई जाने लगीं.
लोग अनुमान लगा ही रहे थे कि क्या प्रियंका रायबरेली से चुनाव लड़ने जा रही हैं?
उन्होंने हँसकर पूछा, ''आप क्या कहते हैं, लड़ना चाहिए?''
कांग्रेस के ऐसे लोगों की संख्या बहुत है जो मानते हैं कि प्रियंका अगर मैदान में आ जाएँ तो कांग्रेस का राजनीतिक भविष्य बदल जाएगा.
प्रियंका ने कहा कि यह उनकी सामान्य यात्रा थी और वे महिलाओं के बीच जो कुछ काम कर रही हैं उसका जायज़ा लेने आई हैं.
उनका कहना था कि वे एक दिन अकेले घूमना चाह रहे थे, बिना सुरक्षाकर्मियों के और बिना पत्रकारों का ध्यान आकर्षित किए.
फिर उन्होंने सफ़ाई दी कि राहुल उनके साथ इसलिए है क्योंकि वो उनको भी अपना काम दिखाना चाहती थीं.
तभी किसी पत्रकार ने पूछा, ''क्या आप लोग अपनी दादी की कुर्सी अपनी माँ को दिला पाएँगे?''
जवाब दिया राहुल ने, ''वो अपने आप ये कुर्सी ले लेंगीं.''
क्या उन पर राजनीति में आने का दबाव है? और उन्हें कैसा लगता है?
इसके जवाब में उन्होंने कहा, ''दबाव का कोई मसला नहीं है, जब सही समय होगा राजनीति में आ जाएँगे.''
राहुल गाँधी ने कहा कि उन्हें राजनीति पसंद है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे राजनीति में आ रहे हैं.
अभी चुनाव की गर्मी बढ़ने वाली है और ये सवाल बार-बार पूँछे जाएँगें, जैसे कि हर चुनाव के पहले पूछे जाते हैं.