श्रीलंका की राष्ट्रपति चंद्रिका कुमारतुंगा की पार्टी ने तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ एक नया मोर्चा बनाया है.
यह मोर्चा एलटीटीई को अलग राज्य के गठन से रोकेगा.
यह नया मोर्चा पुराने वामपंथी क्रांतिकारियों के संगठन जेवीपी के साथ मिलकर बनाया गया है जो तमिल विद्रोहियों को किसी भी तरह के अधिकार सौंपने का विरोध करते रहे हैं.
सोमवार को ही तमिल विद्रोहियों ने कहा था कि प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के बीच चल रहे सत्ता की लड़ाई की वजह से शांति समझौता संकट में है.
तमिल विद्रोही और सरकार के बीच दो साल से शांति समझौता चल रहा है.
राष्ट्रपति कुमारतुंगा की पीपुल्स एलायंस पार्टी और जेवीपी के बीच हुए समझौते में कहा गया है कि श्रीलंका की अखंडता ख़तरे में हैं.
दोनों पार्टियों ने एक संयुक्त बयान में कहा है कि तमिल विद्रोहियों के साथ चल रही शांति वार्ता श्रीलंका में एक तमिल राज्य के गठन के लिए चल रही है.
शांति वार्ता खटाई में
वर्ष 2002 में तमिल विद्रोहियों ने अलग राज्य की माँग यह कहकर खारिज कर दी थी कि वे स्वायत्तता देने पर भी समझौते के लिए राज़ी हैं.
बीबीसी संवाददाता फ़्रांसिस हैरिसन का कहना है कि मोर्चा के लिए शांति प्रक्रिया को आगे खींचना मुश्किल दिखाई देता है क्योंकि तमिल विद्रोही ज़्यादा स्वायत्तता की शर्त पर ही बात करना चाहते हैं.
हालांकि दोनों पार्टियाँ कह रही हैं कि वे तमिल विद्रोहियों के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं लेकिन वे स्वायत्तता के प्रस्ताव को यह कहकर खारिज कर रहे हैं कि इससे अलग राज्य की ज़मीन तैयार होगी.