वैश्वीकरण का विरोध करने वाले लगभग 75,000 कार्यकर्ता भारत की व्यावसायिक राजधानी मुंबई में इकट्ठा हो रहे हैं.
शुक्रवार से शुरू हो रही ये छह दिवसीय बैठक पहली बार किसी एशियाई शहर में रही है.
बैठक में शामिल हो रहे लोग लगभग ढाई हज़ार ग़ैर सरकारी संगठनों से जुड़े हैं.
मंच की ये चौथी बैठक है. इस बैठक में वैश्वीकरण से लेकर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और मानवाधिकारों जैसे मसले उठाए जाएँगे.
मुख्य तौर पर ट्रेड यूनियन, ग़ैर सरकारी संगठनों और वामपंथी दलों के कार्यकर्ताओं वाले इस विश्व सामाजिक मंच के पीछे की सोच आर्थिक वैश्वीकरण का विरोध करने वाले एक अंतरराष्ट्रीय मंच की है.
वर्ष 2001 में इसकी शुरुआत हुई थी और मंच की पहली तीन बैठकें ब्राज़ील में हुई हैं.
ब्राज़ील स्वाभाविक तौर पर ही इसका केंद्र रहा है क्योंकि एक तो वहाँ आर्थिक वैश्वीकरण का उल्टा असर साफ़ दिख रहा है वहीं ब्राज़ील के समाज ने काफ़ी सक्रिय रूप से इसका विरोध भी किया है.
भारत की ओर रुख़
मंच की बैठक भारत में करवाने का एक मक़सद ये भी है कि अब तक इस आंदोलन में जहाँ यूरोपीय या अन्य पश्चिमी देश प्रभावी भूमिका निभाते रहे हैं तो अब इसमें और लोगों को जोड़ा जाए.
इस आंदोलन में अब विश्व के कुछ ग़रीब देशों और लोगों को शामिल करने की योजना है.
अब इस मंच का एजेंडा भी व्यापक करने की योजना है. अब न सिर्फ़ आर्थिक वैश्वीकरण पर चर्चा होगी बल्कि इस बार इराक़ पर अमरीकी हमले, जेनेटिकली मॉडिफ़ाइड खाद्य पदार्थ और नस्लवाद का भी विरोध करने की योजना है.
युद्ध विरोधी कार्यकर्ता भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में आ रही मिठास का तो स्वागत करेंगे मगर भारत में जाति प्रथा इसके निशाने पर होगी.
बल्कि सिर्फ़ जाति प्रथा ही नहीं, बाल श्रम और अमीर-ग़रीब देशों के बीच बढ़ रही खाई जैसे मसले भी भारत सरकार को घेरेंगे.