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सर्दी में पर्यटन की धूम

एक समय था जब लोग मई जून की चिलचिलाती गर्मी से छुटकारा पाने के लिए पहाड़ों पर आते थे लेकिन अब तो मैदानी इलाकों की ठिठुरन और कोहरे से बचने के लिए सर्दियों में भी सैलानी हिल स्टेशनों पर उमड़ रहे हैं.

इस समय जब समूचा उत्तर भारत घने कोहरे की चादर में लिपटा हुआ ठंड से काँप रहा है, पहाड़ों में खुला नीला आसमान है और सुनहरी धूप खिली हुई है.

धूप के लिए तरसते लोगों पर पहाड़ों के इस खुशगवार मौसम का जादू सिर चढ़कर बोल रहा है.

दिल्ली से मसूरी घूमने आए विक्रम सिंह बतातें हैं, “दिल्ली में तो कई दिनों से सूरज को निकलते नहीं देखा. यहाँ ठंड तो है लेकिन धूप ऐसी निकली रहती है कि ठंड का पता ही नही चलता. ऊपर से बर्फ़बारी का मज़ा अलग है. मैंने पहली बार बर्फ गिरते देखी है.”

रोहतक से आई शिल्पी को हैरानी है कि “मौसम तो उल्टा हो गया है, हमारे यहाँ इतनी ठंड है और यहाँ पहाड़ों पर इतना अच्छा मौसम.”

पहाड़ों की रानी मसूरी का ऊपरी इलाका और उसके करीब धनोल्टी में आम तौर पर जनवरी-फरवरी में बर्फ़बारी होती है और जैसे ही इसकी खबर चंडीगढ़ लुधियाना, दिल्ली और लखनऊ पहुँचती है सैलानियों का हुजूम यहाँ आने लगता है.

यही वो समय है जब आसानी से हिमालय की बर्फ से ढँकी चोटियों के दर्शन भी किए जा सकते हैं.

नज़ारे

सूरज की सुनहरी किरणों में झिलमिलाते बद्रीनाथ और केदारनाथ के पहाड़ मसूरी से साफ़ देखे जा सकते हैं जबकि गर्मी और बरसात में अक्सर धुंध और बादल के कारण इन्हें देखना मुश्किल ही होता है.

सैलानियों की धूम का असर यहाँ के होटल-मालिकों की मुस्कान से भी आंका जा सकता है.

मसूरी मे वैली व्यू होटल के मैनेजर आशीष गोयल खुश हैं कि अब सर्दियों में भी आमदनी होने लगी है, “पहले ऐसा होता था कि दिसंबर-जनवरी और फ़रवरी में तो यहाँ सन्नाटा रहता था.

वे कहते हैं, “अब तो इस समय भी टूरिस्ट आते हैं और रौनक करके चले जाते हैं. देखा जाए तो अब कोई महीना ऑफ सीज़न नहीं होता है.”

सर्दियों में पहाड़ों में आने वाले सैलानियों के लिए होटल और गेस्ट हाउस ऑफसीज़न डिस्काउंट भी देते हैं.

सर्दियों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन विभाग भी आगे आया है.

नैनीताल में शरदोत्सव मनाया गया, मसूरी में विंटर कार्निवल मनाने की घोषणा की गई है तो एशिया का स्विट्ज़रलैंड कहे जाने वाले औली में स्कींइग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है.